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आस्था को व्यापार मत बनाओ, श्रद्धा की राह न रोको

  • चूड़धार यात्रियों से शुल्क वसूली पर बढ़ता जनविरोध

  • चूड़ेश्वर सेवा समिति ने सरकार से पुनर्विचार की मांग की

  • समिति ने कहा चढ़ावे से आय होने पर भी सुविधाएं नहीं मिल रहीं


Churdhar entry fee controversy: चूड़धार यात्रा को लेकर सरकार द्वारा श्रद्धालुओं से वसूले जा रहे शुल्क पर विवाद गहराता जा रहा है। इस फैसले का चौतरफा विरोध हो रहा है, खासकर धार्मिक संगठनों और स्थानीय लोगों की ओर से। चूड़ेश्वर सेवा समिति ने न केवल इस फैसले की निंदा की है बल्कि सरकार से इसे तुरंत वापस लेने की मांग भी की है।

नाहन में पत्रकारों से बातचीत में समिति के स्थानीय अध्यक्ष सुरेंद्र हिंदुस्तानी ने तीखा विरोध जताते हुए कहा कि किसी भी श्रद्धालु से एंट्री टैक्स वसूलना गलत है और ऐसा कदम हिंदू धार्मिक आस्थाओं पर चोट जैसा है। उन्होंने कहा कि हिमाचल में पहली बार किसी धार्मिक स्थल पर इस तरह की वसूली हो रही है, जो आगे चलकर एक खतरनाक मिसाल बन सकती है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने इस शुल्क से सिर्फ सोलन, शिमला और सिरमौर के लोगों को छूट दी है जबकि प्रदेश के अन्य जिलों और बाहरी राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं। ऐसे में यह निर्णय भेदभावपूर्ण और अस्वीकार्य है।

सुरेंद्र हिंदुस्तानी ने आगे कहा कि चूड़ेश्वर सेवा समिति वर्षों से श्रद्धालुओं की सेवा में जुटी है और आज भी वहां की सारी व्यवस्थाएं समिति ही संभाल रही है, जबकि चूड़धार मंदिर का सारा चढ़ावा सरकार के खाते में जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि फिर भी सरकार श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने में विफल क्यों है

उन्होंने सरकार से मांग की कि श्रद्धालुओं पर बोझ डालने की बजाय, प्रशासन को चाहिए कि वह खुद व्यवस्था मजबूत करे और आस्था स्थलों का व्यावसायीकरण न करे। समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने इस पर पुनर्विचार नहीं किया, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे।