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भारी ओलावृष्टि: एंटी हेल नेट फटे, सेब-मटर और फूलगोभी की फसलें खत्म

  • शिमला के कई हिस्सों में भारी ओलावृष्टि, सेब और सब्जियों की फसल तबाह

  • किसानों को करोड़ों के नुकसान की आशंका, एंटी हेल नेट भी क्षतिग्रस्त

  • 8 मई तक बारिश, ओलावृष्टि और तूफान को लेकर यलो व ऑरेंज अलर्ट जारी



Apple Crop Damage Himachal: हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में शनिवार दोपहर बाद मौसम ने अचानक करवट ली और कई इलाकों में भारी ओलावृष्टि हुई। अपर शिमला के फागू, कुफरी, चियोग, ठियोग, कोटगढ़, कुमारसैन और नारकंडा में ओलों की इतनी अधिक मात्रा गिरी कि जमीन पर मोटी सफेद चादर बिछ गई। इससे सेब, फूलगोभी और मटर की फसल पूरी तरह तबाह हो गई

ठियोग, नारकंडा और कोटगढ़ जैसे प्रमुख बागवानी क्षेत्रों में सेब के पौधों पर ओलों के मोटे निशान पड़ गए हैं। इससे पत्ते, टहनियां और तने टूटकर नीचे गिर गए, जिससे आगामी फसल की उत्पादकता पर गहरा असर पड़ने की आशंका है। इतना ही नहीं, सेब को ओलों से बचाने के लिए लगाए गए ‘एंटी हेल नेट’ भी कई जगहों पर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। किसानों-बागवानों को करोड़ों रुपए के नुकसान का अनुमान है।

उधर, लाहौल-स्पीति की ऊंची चोटियों पर ताजा बर्फबारी ने मौसम को और अधिक ठंडा बना दिया है। ठियोग के शड़याणा गांव में ओलों के ढेर देखे गए। शिमला के रिज मैदान पर टूरिस्ट और स्थानीय लोग छाता लेकर चलते नजर आए।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने शिमला, सोलन, सिरमौर और कुल्लू जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिसमें 40 से 50 किमी/घंटा की रफ्तार से तूफान चलने और ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। इसके साथ ही 4 से 8 मई तक पूरे प्रदेश के लिए यलो अलर्ट भी लागू किया गया है।

मौसम के इस बदले मिजाज का असर तापमान पर भी पड़ा है। प्रदेश के 6 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे गिर चुका है, जिसमें ताबो का तापमान 5.6 डिग्री तक चला गया है। सोलन का तापमान 24 घंटे में 12.5 डिग्री की गिरावट के साथ 18.0 डिग्री पर पहुंच गया। चंबा, मंडी, बिलासपुर, शिमला और मनाली में भी तापमान सामान्य से काफी नीचे दर्ज किया गया है।

केलांग, कल्पा, कुफरी, नारकंडा जैसे क्षेत्रों में ठंड की वापसी हुई है, जबकि मैदानी और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम सुहावना हो गया है