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1 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित धानसर-शिलोली संपर्क मार्ग का उद्घाटन

  • खनाशनी क्षेत्र में 3.30 करोड़ की लागत से 14 सड़कों का निर्माण पूरा

  • 38 करोड़ की महत्वाकांक्षी उठाऊ पेयजल योजना से 27 पंचायतें होंगी लाभान्वित


शिमला (जुब्बल): हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री ने मंगलवार को अपने एक दिवसीय दौरे के तहत ग्राम पंचायत झालटा में 1 करोड़ रुपए की लागत से बनी “धानसर-शिलोली” संपर्क सड़क का उद्घाटन किया। इस अवसर पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र उनका भावनात्मक और पारिवारिक संबंधों वाला हिस्सा है, जिसकी विकास यात्रा की नींव पूर्व मुख्यमंत्री ठाकुर रामलाल ने रखी थी।

मंत्री ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण सबसे चुनौतीपूर्ण कार्यों में से एक है, लेकिन यही सड़कें ग्रामीण इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ती हैं और सेब बागवानी जैसे व्यवसायों के लिए जीवनरेखा सिद्ध होती हैं। उन्होंने कहा कि यह नई सड़क न केवल धानसर और शिलोली के स्थानीय निवासियों को सुविधा देगी, बल्कि सीमवर्ती उत्तराखंड राज्य की किराणु और दुचाणु पंचायतों को भी लाभ पहुंचाएगी।

शिक्षा मंत्री ने बताया कि जुब्बल-नावर-कोटखाई क्षेत्र में 400 करोड़ रुपए की स्वीकृतियों के साथ सड़कों के निर्माण में रिकॉर्ड प्रगति हुई है। पिछले ढाई वर्षों में 125 सड़कों की स्वीकृति दी गई है। खनाशनी क्षेत्र में ही 3.30 करोड़ रुपए की लागत से 14 सड़कों का निर्माण हुआ है, और अन्य शेष क्षेत्रों को भी शीघ्र सड़क संपर्क से जोड़ा जाएगा।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि प्रदेश सरकार ने वित्तीय संकट और हालिया भीषण प्राकृतिक आपदा के बावजूद विकास कार्यों को जारी रखा है। इसके अंतर्गत बिजली, पेयजल और भवन निर्माण में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। हाल ही में 66 केवी सब स्टेशन हटकोटी का लोकार्पण किया गया और अनेक विद्यालय भवनों का निर्माण किया गया।

सबसे महत्वपूर्ण बात, शिक्षा मंत्री ने बताया कि 38 करोड़ रुपए की लागत से एक महत्वाकांक्षी उठाऊ पेयजल योजना निर्माणाधीन है, जिससे पब्बर नदी के माध्यम से 27 पंचायतों को पीने का पानी उपलब्ध कराया जाएगा। यह योजना क्षेत्र की जल समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में एक बड़ा कदम है।

इस अवसर पर ज़िला परिषद सदस्य कौशल मुंगटा, कांग्रेस मंडल के पूर्व अध्यक्ष मोतीलाल डेरटा, हिमफेड निदेशक भीम सिंह झौटा, युवा कांग्रेस के विभिन्न पदाधिकारी, स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि और उत्तराखंड की किराणु और दुचाणु पंचायतों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।