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उपभोक्ता आयोग में नियुक्तियां न करने पर हाईकोर्ट ने अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी नजीम को अवमानना नोटिस जारी किया।
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न्यायालय ने सरकार पर आदेशों की अवहेलना का आरोप लगाया, 26 मई को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश।
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चयन समिति की सिफारिशों को सरकार ने लंबित रखा, जबकि प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति न करने पर राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी नजीम को न्यायालय की अवमानना के आरोप में नोटिस जारी किया गया है और उन्हें 26 मई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अदालत को स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया गया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने यह कार्रवाई करते हुए कहा कि सरकार जानबूझकर न्यायालय के आदेशों की अनदेखी कर रही है।
अदालत ने कहा कि 4 अप्रैल 2025 को पारित आदेश के बावजूद अब तक उपभोक्ता आयोग में नियुक्तियां नहीं की गईं, जो न्यायालय की अवमानना है। यह भी स्पष्ट किया गया कि 27 नवंबर 2024 को चयन समिति, जिसकी अध्यक्षता न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर ने की थी, ने राज्य उपभोक्ता आयोग और शिमला, मंडी, ऊना और नाहन के जिला आयोगों के लिए नामों की सिफारिश की थी। लेकिन सरकार ने अब तक कोई निर्णय नहीं लिया।
कोर्ट ने यह भी कहा कि चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा और साक्षात्कार आयोजित किए गए थे, अंक प्रदान किए गए और योग्यता क्रम के अनुसार नामों का पैनल तैयार हुआ था। इस पैनल में सचिव आशीष सिंघमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे। विशेष रूप से, चयन समिति में अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी नजीम भी शामिल थे और उस समय उन्होंने चयन प्रक्रिया या सिफारिशों पर कोई आपत्ति नहीं जताई थी, जबकि अब महाधिवक्ता इस पर आपत्ति उठा रहे हैं।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 42 और 47 के अनुसार आयोग को विधिवत संचालित करने के लिए अध्यक्ष के साथ सदस्यों की नियुक्ति अनिवार्य है। केवल अध्यक्ष की सेवा अवधि बढ़ाकर काम नहीं चलाया जा सकता। कोर्ट ने यह भी दोहराया कि नियुक्तियों को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता, खासकर जब चयन समिति द्वारा सभी आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर ली गई हो।



