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भाजपा प्रवक्ता विवेक शर्मा ने जंगल कटान और सरकार की नीतियों पर उठाए गंभीर सवाल
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बिलासपुर, सिरमौर, चंबा, मंडी और चौपाल में बड़े स्तर पर अवैध कटान, रिपोर्टें पीएमओ तक
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सरकार का 652 वर्ग किमी वन क्षेत्र बढ़ने का दावा “मगरमच्छ के आंसू”, असल में जंगल हो रहे बंजर
सोलन, हिमानी ठाकुर: भाजपा प्रदेश प्रवक्ता विवेक शर्मा ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्य सरकार पर वन संरक्षण के नाम पर दिखावा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि “सरकार के आंकड़े मगरमच्छ के आंसू हैं” जबकि हकीकत में हिमाचल के जंगल कट रहे हैं और वन माफिया फल-फूल रहा है।
सरकार दावा कर रही है कि वर्ष 2023 में 15228.35 वर्ग किलोमीटर का वन क्षेत्र 2025 में बढ़कर 15880.35 हो गया है, यानी 652 वर्ग किमी की वृद्धि हुई है, और इसे 28% बताते हुए 2030 तक 30% का लक्ष्य तय किया गया है। लेकिन हकीकत में खनन और अवैध कटान ने हिमाचल के जंगलों को बंजर बना दिया है।
सबसे चौंकाने वाली घटनाएं बिलासपुर के स्वारघाट वन परिक्षेत्र से जुड़ी हैं जहां 18 करोड़ की खैर की लकड़ी के अवैध कटान की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच चुकी है। विवेक शर्मा ने याद दिलाया कि 2017 में कांग्रेस कार्यकाल के दौरान श्री नैना देवी क्षेत्र में भी ऐसी ही घटना हुई थी।
चंबा के हिमगिरि क्षेत्र में कश्मल की 400 से 500 साल पुरानी औषधीय जड़ों को जड़ से उखाड़ा जा रहा है। अब तक 8 क्विंटल जड़ें जब्त की गई हैं, लेकिन असल तस्करी का आंकड़ा कहीं अधिक हो सकता है। 24 जनवरी 2025 की कैबिनेट बैठक में भी इस मुद्दे को उठाया गया था, मगर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सिरमौर के पोंटा साहिब डिवीजन में तीन वर्षों में 14 FIR फॉरेस्ट विभाग ने दर्ज की हैं। केवल 3 अप्रैल 2025 को बहराल बीट में 30 खैर के पेड़ अवैध रूप से काटे गए और सीसीटीवी कैमरे “तकनीकी खराबी” के चलते बंद पाए गए। फॉरेस्ट डिवीजन SP को पत्र लिख रहा है लेकिन कार्रवाई न के बराबर है।
चौपाल के थरोच क्षेत्र में तो वन विभाग की मिलीभगत से एक समुदाय की बस्तियां जंगल में बसाई जा रही हैं।
ऊना के बॉर्डर बैरियर पर ₹10,000 में ट्रक पंजाब भेजे जा रहे हैं और मंडी के धर्मपुर क्षेत्र में अवैध फॉरेस्ट डिपो बहरी व खरोट गांव में खुले हुए हैं। यहां लकड़ी के स्लीपर मिट्टी में छिपाकर रखे जा रहे हैं।
जब यह मामला विधानसभा में उठा तो जांच उन्हीं अधिकारियों को सौंपी गई जो खुद संदिग्ध हैं।
विवेक शर्मा ने कहा कि “पेड़ लगाना नहीं, पेड़ बचाना जरूरी है। अब हिमाचल को किनकरी देवी जैसी जागरूकता की जरूरत है।”



