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“नीरज भारती की पोस्ट पॉलिटिक्स: एक पल मंत्री पिता चंद्र कुमार के इस्तीफा का ऐलान, अगले पल मारी पलटी बोले देखते हैं – क्या चल रहा है कांग्रेस में?”

➤ मंत्री चंद्र कुमार के बेटे नीरज भारती की फेसबुक पोस्ट से सियासी भूचाल
➤ इस्तीफे का दावा लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं
➤ संगठन को लेकर मंत्री के बयान और पुत्र की टिप्पणी से कांग्रेस में हलचल

पराक्रम चंद, शिमला/ दौलत चौहान, ज्‍वाली



हिमाचल प्रदेश की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। कारण है प्रदेश सरकार में कृषि एवं पशुपालन मंत्री चंद्र कुमार के पुत्र नीरज भारती द्वारा की गई दो तीखी फेसबुक पोस्टें, जिन्होंने प्रदेश की सत्ता और कांग्रेस पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

नीरज भारती, जो पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रह चुके हैं, ने अपनी पहली पोस्ट में लिखा, “अगर काम दलालों के होंगे तो मंत्री बनकर क्या फायदा?” इसके साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पिता चंद्र कुमार ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। इस पोस्ट के कुछ ही देर बाद, उन्होंने दूसरी पोस्ट में लिखा कि “फिलहाल चौधरी साहब से आश्वासन मिल गया है, कल मुख्यमंत्री से बात होगी, फिर देखते हैं।”

हालांकि सरकारी या पार्टी स्तर पर मंत्री चंद्र कुमार के इस्तीफे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सोशल मीडिया पर यह पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है। इस घटना ने कांग्रेस के भीतर की स्थिति को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों और कार्यकर्ताओं के बीच बहस छेड़ दी है।

गौरतलब है कि चंद्र कुमार ने कुछ दिन पहले ही एक सार्वजनिक मंच से कहा था कि “संगठन पूरी तरह पैरालाइज हो चुका है, और जब संगठन ही नहीं रहेगा तो पार्टी कैसे चलेगी?” उनके इस बयान ने पहले ही संगठनात्मक निष्क्रियता और नेतृत्व पर सवाल खड़े कर दिए थे।

अब नीरज भारती की खुली टिप्पणी और इस्तीफे का दावा इन अटकलों को और गहरा कर रहा है कि सरकार और संगठन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। नीरज भारती अपने बेबाक और आक्रामक बयानों के लिए जाने जाते हैं, और इस बार उन्होंने अपनी ही सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा दिए हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकता है, खासकर तब जब पार्टी पहले से ही आंतरिक गुटबाजी से जूझ रही है। यदि मंत्री चंद्र कुमार का इस्तीफा वास्तव में होता है, तो यह सरकार की स्थिरता और कांग्रेस की साख दोनों के लिए बड़ा झटका हो सकता है।

फिलहाल कांग्रेस हाईकमान और प्रदेश नेतृत्व की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन भीतरखाने हलचल तेज हो गई है। यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि यह इस्तीफा वास्तविक है या राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति, लेकिन इतना तय है कि नीरज भारती की पोस्ट ने सियासी पारा चढ़ा दिया है।