Follow Us:

शिमला में बागवानों ने भरी हुंकार, आयात नीति के खिलाफ बड़ा ऐलान, जानें


सेब उत्पादक राज्यों के बागवानों ने शिमला में दिखाई एकजुटता
यूसुफ तारिगामी बोले, मोदी सरकार वादे करती है लेकिन निभाती नहीं
9 जुलाई को देशव्यापी आंदोलन में बागवान भी होंगे शामिल

पराक्रम चंद, शिमला


शिमला, 23 जून 2025 – हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड जैसे देश के प्रमुख सेब उत्पादक राज्यों के बागवानों ने आज शिमला के ऐतिहासिक कालीबाड़ी हॉल में एकजुट होकर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ निर्णायक संघर्ष की घोषणा की।
इस अवसर पर एप्पल फार्मर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFFI) और हिमाचल सेब उत्पादक संघ की संयुक्त आम सभा आयोजित की गई जिसमें हजारों की संख्या में बागवानों ने भाग लिया। सभा का उद्देश्य सेब पर आयात शुल्क में कटौती, एमएसपी की मांग, और बीमा लाभों में अनदेखी के खिलाफ संगठित होकर आवाज़ बुलंद करना था।

सभा की अध्यक्षता करते हुए एएफएफआई के राष्ट्रीय संयोजक और जम्मू-कश्मीर के कुलगाम से विधायक मोहम्मद यूसुफ तारिगामी ने मोदी सरकार पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने कहा, “सरकार वादे करने में अव्वल है लेकिन निभाने में बेहद पीछे।” उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अमेरिका के दबाव में विदेशी सेबों के लिए भारतीय बाजार खोलने की तैयारी कर रही है, जिससे देश के बागवानों को गहरा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

तारिगामी ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की मांग वर्षों से लंबित है। सरकार केवल घोषणाओं और भाषणों तक सीमित है। कश्मीर में फसल बीमा योजना लागू नहीं है, और अन्य राज्यों में भी किसानों को नाममात्र का लाभ मिल रहा है। खाद, कीटनाशकों और अन्य कृषि आवश्यकताओं पर कोई सब्सिडी नहीं दी जा रही, जबकि महंगाई चरम पर है।

सभा में यह ऐलान किया गया कि अगर सरकार ने बागवानों की अनदेखी जारी रखी, तो संघर्ष तेज किया जाएगा9 जुलाई को देशभर की ट्रेड यूनियनों द्वारा आयोजित धरनों में AFFI की भागीदारी रहेगी और पूरे देश में बागवानों की आवाज़ बुलंद की जाएगी

सभा में यह भी प्रस्ताव पारित हुआ कि यदि केंद्र सरकार सेब पर आयात शुल्क बहाल नहीं करती, और स्थानीय बागवानों की रक्षा नहीं करती, तो पूरे उत्तर भारत में बड़े पैमाने पर आंदोलन खड़ा किया जाएगा।