➤ कांगड़ा की आशा वर्करों ने मुख्यमंत्री को सौंपा मांगों का ज्ञापन
➤ सरकारी दर्जे व ₹18,000 मानदेय की प्रमुख मांग उठाई
➤ मांगे न मानी गईं तो रैली और शिमला कूच की चेतावनी
शिवांशु शुक्ला, धर्मशाला
धर्मशाला में मंगलवार को भारतीय मजदूर संघ के सहयोग से हिमाचल प्रदेश आशा कार्यकर्ता संघ, कांगड़ा की आशा वर्करों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जिला उपायुक्त कार्यालय के बाहर एकत्रित होकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से कार्यकर्ताओं ने सरकार से मांग की कि जिला कांगड़ा में कार्यरत सभी आशा वर्करों को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए, ताकि उन्हें भी स्थायी सेवा का लाभ मिल सके।
आशा कार्यकर्ताओं की मांग थी कि जब तक उन्हें सरकारी दर्जा नहीं दिया जाता, तब तक उनका न्यूनतम मासिक मानदेय ₹18,000 किया जाए। इसके साथ-साथ उन्होंने अनुभवी कार्यकर्ताओं को टीकाकरण का प्रशिक्षण, चिकित्सालयों में विश्राम कक्ष, यात्रा भत्ता, कार्य की समय सीमा, और आपातकालीन दवाइयों से युक्त बैग की उपलब्धता जैसी सुविधाएं भी तत्काल लागू करने की मांग की।
संघ की सचिव कल्पना रंधावा ने जानकारी देते हुए कहा कि इस समय कांगड़ा जिले में लगभग 2000 और प्रदेश भर में 8000 आशा वर्कर सेवाएं दे रही हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना काल के दौरान आशा वर्करों ने फ्रंटलाइन वॉरियर्स की तरह कार्य किया, लेकिन आज उन्हें अनदेखा किया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुँचाने वाली आशा वर्करों को उचित सम्मान और सुविधाएं नहीं दी जा रहीं।
आशा वर्करों ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो जिले भर की कार्यकर्ता एकजुट होकर रैली निकालेंगी, और आवश्यकता पड़ने पर शिमला जाकर प्रदर्शन करेंगी। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी सभी मांगों को पूरा नहीं किया जाता।



