➤ वीरभद्र सिंह की पुण्यतिथि पर राज्यपाल ने बताया उन्हें श्रेष्ठ और संस्कृति रक्षक
➤ रामपुर पदम पैलेस में कार्यक्रम, बड़ी हस्तियों ने दी श्रद्धांजलि
➤ गरीबों के प्रति संवेदनशील और अफसरशाही पर मजबूत पकड़ थी वीरभद्र की
हिमाचल प्रदेश के छह बार के मुख्यमंत्री रहे दिवंगत वीरभद्र सिंह की चौथी पुण्यतिथि पर मंगलवार को रामपुर के ऐतिहासिक पदम पैलेस में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, आरएस बाली, और कई अन्य प्रमुख नेता एवं गणमान्य हस्तियाँ शामिल हुईं।

राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने वीरभद्र सिंह को याद करते हुए उन्हें श्रेष्ठ मनुष्य और हिमाचल की संस्कृति व पवित्रता के संरक्षक के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा कि जब देश में धर्मांतरण के विरुद्ध कोई कानून नहीं था, तब वीरभद्र सिंह ने हिमाचल प्रदेश में धर्मांतरण विरोधी कानून पारित कर एक ऐतिहासिक कदम उठाया था। उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह ने हमेशा देवभूमि की परंपराओं और संस्कृति को सहेजने का कार्य किया।

इस कार्यक्रम में वीरभद्र सिंह के पुत्र विक्रमादित्य सिंह ने राज्यपाल का पदम पैलेस में स्वागत किया। श्रद्धांजलि देने के लिए प्रदेशभर से सैकड़ों लोग रामपुर पहुंचे, जिन्होंने वीरभद्र सिंह के कार्यों और मानवीय संवेदनाओं को याद किया।

इस दौरान वीरभद्र सिंह के लंबे समय तक सहयोगी और पूर्व सूचना एवं जन संपर्क अधिकारी बीडी शर्मा ने भी अपने संस्मरण साझा किए। उन्होंने बताया कि वीरभद्र सिंह जब भी किसी गरीब व्यक्ति से मिलते थे, तो उनकी आंखें नम हो जाती थीं। वह गरीबों के लिए बेहद संवेदनशील थे और उनकी मदद के लिए हर समय तत्पर रहते थे।

बीडी शर्मा ने बताया कि वीरभद्र सिंह की एक खासियत यह थी कि वह किसी फाइल पर सेक्रेटरी की बजाय निचले स्तर के कर्मचारी की नोटिंग को ज्यादा महत्व देते थे, यदि वह बात प्रदेश हित में होती थी। वह रोजाना सुबह 3–4 बजे उठकर फाइलें पढ़ते थे, जिससे वह हर विषय की गहराई तक जानकारी रखते थे। इसी कारण से अफसरशाही भी उनसे खौफ खाती थी।
उन्होंने आगे कहा कि वीरभद्र सिंह के प्रयासों से पीटरहॉफ, बैंटनी कैसल जैसी हैरिटेज इमारतें संरक्षित रह पाईं, जो आज शिमला की पहचान बन चुकी हैं। इस आयोजन ने एक बार फिर प्रदेश के इतिहास और राजनीति में वीरभद्र सिंह के अमिट योगदान को यादगार बना दिया।



