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हिमाचल में प्रदर्शन करने वाले आठ निलंबित जेबीटी शिक्षक चार्जशीट


हिमाचल में प्रदर्शन करने वाले आठ निलंबित जेबीटी शिक्षकों को चार्जशीट किया गया
शिक्षा निदेशालय ने 10 दिन में जवाब देने का दिया अल्टीमेटम, असंतोषजनक जवाब पर जांच तय
शिक्षा मंत्री से सहमति के बावजूद कार्रवाई पर जेबीटी संघ ने उठाए सवाल


हिमाचल प्रदेश में जेबीटी शिक्षकों के आंदोलन को लेकर बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। राजधानी शिमला के चौड़ा मैदान में प्रदर्शन करने के आरोप में आठ निलंबित जेबीटी शिक्षकों को अब चार्जशीट किया गया है। स्कूल शिक्षा निदेशालय ने इन शिक्षकों को केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1965 के नियम 18 के तहत चार्जशीट करते हुए बुधवार को मेमोरेंडम जारी किया और दस दिन के भीतर लिखित पक्ष रखने को कहा है।

शिक्षा निदेशक आशीष कोहली द्वारा जारी मेमोरेंडम में कहा गया है कि यदि शिक्षकों की ओर से असंतोषजनक उत्तर प्राप्त होता है, तो उनके विरुद्ध विभागीय जांच शुरू की जाएगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि जांच केवल उन्हीं आरोपों तक सीमित होगी, जिन्हें शिक्षकों ने नकारा होगा। अगर शिक्षक निर्धारित समय में जवाब नहीं देते, तो एकतरफा जांच कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

प्रदर्शन को लेकर आरोप हैं कि बिना अनुमति प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने सरकार और उच्च अधिकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं और राजनीतिक दबाव के माध्यम से प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया गया, जो कि केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1964 के नियम 20 का उल्लंघन है।

चार्जशीट किए गए शिक्षकों में जेबीटी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश शर्मा, मंडी से राम सिंह राव, हेम राज, शिमला से प्रमोद कुमार चौहान, ऊना से सुनीता शर्मा, कांगड़ा से अनिल कुमार, संजय कुमार और सिरमौर से प्रताप ठाकुर शामिल हैं।

गौरतलब है कि शिक्षा निदेशालय के पुनर्गठन के खिलाफ जेबीटी शिक्षक संघ ने लगभग सवा माह तक क्रमिक अनशन किया था। उस समय शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर स्वयं मौके पर पहुंचे थे और अनशन समाप्त करवाया था, जिस दौरान सहमति बनी थी कि निलंबन आदेश वापस लिए जाएंगे। लेकिन अब चार्जशीट जारी होने पर शिक्षक संघ ने नाराजगी जताई है। प्रदेश अध्यक्ष जगदीश शर्मा ने कहा कि मंत्री के आश्वासन के अनुसार आदेश जारी नहीं हुए, जो कि सरकार की निष्क्रियता को दर्शाता है