➤ मनूणी खड्ड में तेज बहाव के कारण पांच शव बरामद, तीन अब भी लापता
➤ रेस्क्यू अभियान में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस की टीमें तैनात
➤ बारिश से अभियान प्रभावित, मौसम साफ होते ही ड्रोन से तलाशी की योजना
शिवांंशु शुक्ला, धर्मशाला
जिला मुख्यालय धर्मशाला के समीप खनियारा क्षेत्र में बहने वाली मनूणी खड्ड में बुधवार को अचानक आए तेज जल बहाव ने जनजीवन को झकझोर कर रख दिया। खड्ड में बहने से एक जेसीबी, पानी का टैंकर और हाइड्रो प्रोजेक्ट से जुड़े मजदूर बह गए। हादसे में अब तक 5 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि तीन मजदूरों की तलाश अब भी जारी है। तेज बारिश के बीच एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पुलिस की टीमें लगातार रेस्क्यू अभियान में जुटी हैं। मौसम साफ होने के बाद ड्रोन की मदद से भी सर्च ऑपरेशन चलाने की योजना है।

अब तक जिन मृतकों की पहचान हुई है, उनमें चैन सिंह (जम्मू-कश्मीर), आदित्य ठाकुर (चंबा), प्रदीप वर्मा व चंदन (उत्तर प्रदेश) और संजय (कांगड़ा) शामिल हैं। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। प्रशासन के अनुसार, हादसे की सूचना बुधवार दोपहर बाद मिली, जिसके बाद जिला प्रशासन ने रेस्क्यू टीमें मौके पर भेजीं। घटनास्थल पर पहुंचे अधिकारियों को दो शव और ऊपर की ओर बहते तीन और शव मिले। बाद में यह पुष्टि हुई कि प्रोजेक्ट में काम कर रहे छह लोग लापता हैं और एक जंगल की ओर भाग गया है।

खास बात यह रही कि जंगल की ओर भागा एक श्रमिक जीवित मिला, जिसे एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने आज सुबह रेस्क्यू किया। उसने बताया कि जब खड्ड में पानी का स्तर अचानक बढ़ा, तो वह डर के कारण जंगल की ओर भाग गया और रातभर वहीं छिपा रहा। उसने यह भी बताया कि रात के अंधेरे में उसे एक भालू दिखा, जिससे वह किसी तरह बचते हुए एक नाले में छिप गया। वहीं से सुबह उसे बचा लिया गया।

एडीएम कांगड़ा शिल्पी बेक्टा ने बताया कि रेस्क्यू अभियान में लगातार हो रही बारिश सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। मौसम साफ होने पर ड्रोन की मदद ली जाएगी ताकि लापता लोगों की तलाश तेज हो सके। डीसी कांगड़ा हेमराज बैरवा ने कहा कि मनूणी खड्ड हादसे में अब तक पांच शव बरामद हो चुके हैं, एक शव को अभी रेस्क्यू किया जा रहा है जिसकी पहचान की प्रक्रिया जारी है। प्रशासन ने प्रोजेक्ट में लगे श्रमिकों और लेबर ठेकेदारों की मौजूदगी की गणना शुरू कर दी है ताकि सही आंकड़ा स्पष्ट हो सके।
प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई है कि बरसात के इन दिनों में खड्ड, नालों और नदी किनारे जाने से बचें, क्योंकि अचानक जलस्तर बढ़ने की आशंका लगातार बनी रहती है। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर प्रदेश में मानसून के दौरान आपदा प्रबंधन की गंभीरता को उजागर कर दिया है।



