➤ एआईएमएसएस चामियाना में आधुनिक ईयूएस तकनीक से सफल इलाज
➤ बिना ओपन सर्जरी पैंक्रियाटाइटिस के जटिल मामलों का हुआ समाधान
➤ हिमाचल के मरीजों को अब पीजीआई चंडीगढ़ जाने से मिलेगी मुक्ति
शिमला के अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपरस्पेशलिटीज (AIMSS), चामियाना के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग ने चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है । संस्थान में पहली बार एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (EUS) निर्देशित सिस्टोगास्ट्रोस्टोमी (Cystogastrostomy) प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया है । यह तकनीक एंडोस्कोपी और अल्ट्रासाउंड इमेजिंग का एक उन्नत मेल है, जिससे पेट के भीतर अंगों को रीयल-टाइम में देखकर सटीक उपचार किया जाता है ।
अस्पताल में एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस से जूझ रहे दो मरीजों का इस पद्धति से सफल इलाज किया गया । इनमें से एक युवा महिला के पेट में भारी द्रव जमा हो गया था, जिससे उन्हें लगातार उल्टियां और भोजन करने में असमर्थता हो रही थी । दूसरे पुरुष मरीज के पेट में भी कई जगह संक्रमण और तरल पदार्थ का जमाव था । प्रो. बृज शर्मा (प्रिंसिपल एवं विभागाध्यक्ष) के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने ईयूएस तकनीक का उपयोग करते हुए बिना ओपन सर्जरी के पेट और संक्रमित हिस्से के बीच एक मार्ग बनाकर आंतरिक ड्रेनेज सुनिश्चित किया ।
डॉक्टरों की इस टीम में डॉ. राजेश शर्मा, डॉ. विशाल बोध, डॉ. आशीष चौहान, डॉ. जगरूप, डॉ. नवीन, डॉ. यशदीप, डॉ. नलिन और उनकी सहयोगी टीम शामिल रही । गौरतलब है कि इससे पहले इन आधुनिक सुविधाओं के अभाव में मरीजों को पीजीआई चंडीगढ़ (PGI Chandigarh) या राज्य से बाहर रेफर करना पड़ता था । मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के विजन के अनुरूप संस्थान में आधुनिक मशीनरी उपलब्ध करवाई गई है, जिससे अब हिमाचल में ही विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं । इसके अलावा, विभाग ने कोलांगियोस्कोपी (Cholangioscopy) प्रक्रियाएं भी शुरू की हैं, जिससे पित्त नली की पथरी को तोड़ना और बायोप्सी लेना आसान हो गया है ।



