➤ लोकभवन में शिष्टाचार भेंट, शिक्षा और अनुसंधान पर विस्तृत चर्चा
➤ वैज्ञानिक व प्रमाण-आधारित शोध पद्धति पर जोर, सामाजिक चुनौतियों के समाधान की जरूरत
➤ नशा-निवारण और जन-जागरूकता अभियान, विश्वविद्यालयों की सक्रिय भूमिका पर बल
लोकभवन, शिमला में बाहरा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कृष्णकान्त दवे ने राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान शिक्षा, अनुसंधान और समाज से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक विचार-विमर्श हुआ।

राज्यपाल ने उच्च शिक्षण संस्थानों में मजबूत और व्यवस्थित अनुसंधान पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि आज की सामाजिक चुनौतियों का समाधान केवल भावनात्मक या पारंपरिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और प्रमाण-आधारित दृष्टिकोण से किया जाना चाहिए। विश्वविद्यालयों को शोध की गुणवत्ता बढ़ाने और नवाचार को प्रोत्साहित करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
बैठक में विशेष रूप से ड्रग्स, सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता, मानसिक स्वास्थ्य और नशा-निवारण जैसे संवेदनशील विषयों पर व्यापक जन-जागरूकता की आवश्यकता पर चर्चा हुई। राज्यपाल ने कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए संतुलित आहार, नियमित स्वास्थ्य जांच, स्वच्छ जीवनशैली और युवाओं में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने विश्वविद्यालयों से अपेक्षा की कि वे शोध परियोजनाओं, स्वास्थ्य शिविरों, जागरूकता अभियानों और सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में स्वास्थ्य और नशा-निवारण के प्रति चेतना फैलाने में अग्रणी भूमिका निभाएं।
कुलपति प्रो. दवे ने कहा कि राज्यपाल का मार्गदर्शन विश्वविद्यालय के चांसलर गुरविंदर सिंह बाहरा के दूरदर्शी विजन के अनुरूप है। उन्होंने शैक्षणिक उत्कृष्टता, सामाजिक उत्तरदायित्व, सामुदायिक भागीदारी और राष्ट्र-निर्माण के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता दोहराई।
इस मुलाकात को शिक्षा और समाज के बीच बेहतर समन्वय की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है।



