➤मंडी जिला में सबसे ज्यादा तबाही, सर्च ऑपरेशन जारी
➤70 हजार लोगों को सिविल डिफेंस प्रशिक्षण देगी सरकार
पराक्रम चंद, शिमला
शिमला। हिमाचल प्रदेश में इस बार मानसून ने कहर बरपा दिया है। लगातार बारिश, बादल फटने और भूस्खलन से अब तक 62 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 40 लोग अभी भी लापता हैं। सबसे ज्यादा नुकसान मंडी जिला में हुआ है, जहां बादल फटने की घटनाओं से कई गांव प्रभावित हुए हैं। सैकड़ों घर जमींदोज हो चुके हैं और दर्जनों लोग मलबे में दबे होने की आशंका है।
मुख्यमंत्री के मीडिया एडवाइजर नरेश चौहान ने बताया कि मानसून के शुरुआती दौर से ही प्रदेश में भारी बारिश का सिलसिला शुरू हो गया था। जगह-जगह बादल फटने की घटनाओं में जान-माल का बड़ा नुकसान हुआ है। प्रदेश सरकार राहत और बचाव कार्य को प्राथमिकता पर ले रही है। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें लगातार सर्च अभियान में जुटी हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं आपदा प्रभावित इलाकों का दौरा कर राहत सामग्री बांट रहे हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए निर्माण विभाग, जल शक्ति विभाग और अन्य विभागों के सभी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं।
नरेश चौहान ने बताया कि आपदाओं से निपटने के लिए अब प्रदेश की एक फीसदी आबादी यानी करीब 70 हजार लोगों को सिविल डिफेंस वालंटियर्स के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। केंद्र सरकार ने पूरे हिमाचल को सिविल डिफेंस टाउन घोषित किया है। इसके तहत हर जिले और पंचायत स्तर पर वालंटियर्स तैयार किए जाएंगे, जो आपदा के दौरान तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर सकें।
उन्होंने कहा कि अब तक 3600 से ज्यादा पंचायतों में 28 हजार वालंटियर्स को सर्च एंड रेस्क्यू का प्रशिक्षण दिया गया है। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के पहुंचने में जो समय लगता है, उसमें ये प्रशिक्षित वालंटियर्स प्रभावित लोगों की मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार मानसून में मारे गए लोगों के परिजनों को मुआवजा और बेघर हुए परिवारों को राहत देने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
नरेश चौहान ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे आपदा की स्थिति में सतर्कता बरतें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।



