मंडी की त्रासदी में भाजपा के नेता भिड़े, जनता पूछ रही सवाल
➤मंडी में आपदा पर कंगना-जयराम आमने-सामने हुए
➤कंगना ने जयराम को ही ठहराया मंडी न आने का जिम्मेदार
➤आपदा में आरोप-प्रत्यारोप से जनता में नाराजगी
पंकज पंडित, समाचार फर्स्ट
मंडी जिला में आई सबसे बड़ी आपदा के बीच मंडी के दो सबसे बड़े नेता आमने-सामने हो गए हैं। जयराम ठाकुर ने जहां सांसद कंगना रनौत की गैरमौजूदगी पर नाराजगी जताई थी, वहीं अब कंगना ने खुलकर पलटवार किया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जयराम ठाकुर ने ही उन्हें सुझाव दिया था कि हालात सामान्य नहीं हैं, इसलिए फिलहाल वहां न जाएं।
कंगना ने सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में लिखा—
“I tried reaching to flood affected areas in Seraj and other areas in Mandi, but advised by respected leader of opposition Shri Jairam Thakur ji to wait untill the connectivity and reach to the affected areas are restored.”
यानी उन्होंने जयराम ठाकुर की सलाह पर मंडी आने का कार्यक्रम टालने का दावा किया।
हालांकि इससे पहले जयराम ठाकुर ने मीडिया के सवालों के जवाब में कहा था कि सांसद का कर्तव्य होता है कि वह संकट के समय जनता के बीच मौजूद रहे। उन्होंने प्रदेश सरकार पर भी आपदा प्रबंधन में लापरवाही के आरोप लगाए थे। अब कंगना की टिप्पणी के बाद जयराम ठाकुर भी सवालों के घेरे में आ गए हैं।
कौन सच बोल रहा है, यह तय करना आसान नहीं। लेकिन आपदा जैसे गंभीर समय में इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप ने लोगों के बीच गहरी नाराजगी पैदा कर दी है। सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि जब राहत, बचाव और पुनर्वास की ज़िम्मेदारी सबसे ज्यादा होती है, तब नेता अपनी जिम्मेदारी एक-दूसरे पर टाल रहे हैं।
कंगना की ‘कीबोर्ड वॉरियर’ वाली टिप्पणी पहले ही विवाद का कारण बन चुकी है। अब उनका जयराम ठाकुर पर सार्वजनिक आरोप एक नई बहस को जन्म दे रहा है। भाजपा के अंदर भी इसे लेकर असहजता दिख रही है। कई राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह घटनाक्रम मंडी में भाजपा की छवि को गहरी क्षति पहुँचा सकता है।
जनता का सवाल अब भी वही है—
आपदा में सियासत क्यों? क्या दोनों नेता मिलकर पीड़ितों की मदद नहीं कर सकते?
बता दें कि हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में भयंकर बारिश और बादल फटने से आई तबाही ने पूरे प्रदेश को हिला दिया है। सैकड़ों घर ध्वस्त हुए, दर्जनों लोग मारे गए और लापता हैं। संकट के इस समय में मंडी से भाजपा सांसद और चर्चित फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत की गैरमौजूदगी पर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो रहा है।
सोशल मीडिया पर मंडी के लोगों और अन्य यूजर्स ने सवाल पूछना शुरू किया कि जब जनता त्रासदी झेल रही है तो उनकी सांसद कहां हैं। ट्विटर पर ‘नॉटी हिमाचल’ नामक एक यूजर ने कंगना की प्राथमिकताओं पर तंज कसते हुए लिखा –
“हिमाचल त्राहिमाम कर रहा है और ये बॉलीवुड में व्यस्त हैं। शर्मनाक।”
इस आलोचना पर कंगना रनौत ने पहले फेसबुक और ट्विटर पर एक औपचारिक पोस्ट साझा की जिसमें उन्होंने मंडी की तबाही पर दुख जताया और लिखा कि नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने उन्हें सुझाव दिया कि सड़क और कनेक्टिविटी बहाल होने तक इंतजार करें। उनके मुताबिक मंडी डीसी ने भी रेड अलर्ट जारी किया है।
लेकिन लगातार सवालों के बाद कंगना ने थोड़ा चिढ़ा हुआ लहजा अपनाते हुए एक और पोस्ट में लिखा कि –
“हाल ही में मैं किरण रिजिजु के साथ मंडी गई थी। मौसम साफ था फिर भी हमारी कार पर चट्टानें गिरीं। शीशे टूटे, डेंट आए। इस समय हिमाचल यात्रा के लिए उपयुक्त नहीं है। सबसे सुरक्षित जगह आपका कीबोर्ड है। अभी मैं ‘कीबोर्ड वॉरियर’ बनने का समर्थन करती हूं। सतर्क रहें, सरकार अपना काम करेगी। हा हा। जय हिंद।”
कंगना की यह टिप्पणी विवादित हो गई। कई यूजर्स ने कहा कि यह गैरजिम्मेदाराना जवाब है और सांसद का दायित्व सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनकी तुलना नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर से की गई, जो खुद लगातार राहत और बचाव कार्यों में शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कंगना की इस प्रतिक्रिया और मंडी में अनुपस्थिति से उनके खिलाफ नकारात्मक माहौल बन रहा है। पहले भी 2023 की त्रासदी में उनकी गैरमौजूदगी सवालों के घेरे में आई थी। इस बार भी उन्हें ‘टूरिस्ट सांसद’ कहने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है।
अभी हिमाचल में भारी बारिश का संकट जारी है और प्रशासन ने अलर्ट बढ़ा दिया है। ऐसे में मंडी के लोग सांसद से मैदान में उतरकर सक्रिय सहयोग की उम्मीद कर रहे हैं।



