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देहरादून में पहले नागरिक उड्डयन सम्मेलन में आरएस बाली ने हिमाचल का प्रतिनिधित्व किया, हेली-टूरिज्म पर मंथन

➤ देहरादून में पहले नागरिक उड्डयन सम्मेलन में आर एस बाली ने हिमाचल का प्रतिनिधित्व किया
➤ सम्मेलन में हेली-टूरिज्म और मेडिकल इवैक्यूएशन पर विशेष चर्चा हुई
➤ उत्तर भारत में हवाई यातायात 2.5 गुना बढ़ा, हिमाचल भी तेजी से शामिल हो रहा

ओजस्‍वी चौहान, सामाचार फर्स्‍ट 



देहरादून, उत्तराखंड। हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (HPTDC) के अध्यक्ष आर.एस. बाली ने शुक्रवार को देहरादून में आयोजित पहले उत्तरी क्षेत्रीय नागरिक उड्डयन सम्मेलन में भाग लिया। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन की अध्यक्षता भारत सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्री किन्जरापु राममोहन नायडू ने की। सम्मेलन में उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों और उड्डयन उद्योग के प्रमुख भागीदारों ने हिस्सा लिया।


सम्मेलन के दौरान नागरिक उड्डयन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने हवाई सेवाओं के विस्तार से जुड़े कई नवाचारों और योजनाओं की प्रस्तुति दी। इसमें हवाई अड्डों और हेलीपोर्ट्स के विकास मॉडल, आपातकालीन स्थितियों के लिए HEMS (हेलीकॉप्टर इमरजेंसी मेडिकल सर्विसेज), ड्रोन ऑपरेशन का विस्तार, और UDAN 2.0 के तहत क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने पर गहन चर्चा की गई।
आर.एस. बाली ने सम्मेलन में हिमाचल प्रदेश की आवश्यकताओं और संभावनाओं को स्पष्ट रूप से रखा। उन्होंने हेली-टूरिज्म, कठिन पर्वतीय इलाकों में मेडिकल इवैक्यूएशन, और पर्यटक सुविधाओं के विकास पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती तकनीक और बढ़ते यात्री आवागमन के दौर में हिमाचल को भी भविष्य की कनेक्टिविटी योजनाओं का हिस्सा बनना होगा।
गौरतलब है कि बीते एक दशक में उत्तर भारत के हवाई अड्डों पर यात्री आवागमन 2.5 गुना बढ़ा है। ऐसे में हिमाचल प्रदेश इस परिवर्तनकारी यात्रा में सक्रिय भूमिका निभाने की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है। UDAN योजना के माध्यम से राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने और पर्यटन व व्यापार को गति देने की योजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
सम्मेलन में उद्योग के अनेक विशेषज्ञों और अधिकारियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। सभी राज्यों ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए सामूहिक दृष्टिकोण पर सहमति जताई। यह सम्मेलन आने वाले वर्षों में नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में व्यापक बदलाव और विकास की नींव रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।