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शनि देव की आंखों में सीधे न देखें

➤ शनिवार को सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का बना विशेष संयोग
➤ शनि पूजा, छाया दान और व्रत से मिल सकती है साढ़ेसाती में राहत
➤ आज पूर्व दिशा में यात्रा से बचें, करें तेल का दान और शनि स्तोत्र का पाठ


5 जुलाई 2025 का शनिवार अत्यंत विशेष संयोग लेकर आया है। आज सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग एक साथ बन रहे हैं, जिनके प्रभाव से शनि पूजा, व्रत, दान-पुण्य और तंत्र साधना के कार्यों में सौगुना फल मिलने की संभावनाएं बनती हैं। पंचांग के अनुसार दशमी तिथि शाम 6:58 बजे तक रहेगी, उसके बाद एकादशी प्रारंभ हो जाएगी। स्वाति नक्षत्र रात 7:51 बजे तक रहेगा, फिर विशाखा नक्षत्र लगेगा। दिनभर सिद्ध योग के प्रभाव में पूजा-पाठ करना लाभकारी रहेगा।

आज पूर्व दिशा में यात्रा वर्जित मानी गई है, इसलिए इससे बचना चाहिए। अगर यात्रा अनिवार्य हो तो सौंफ या जीरा खाकर निकलें। विशेष रूप से शनि की प्रसन्नता के लिए आज शनि मंदिर में सरसों के तेल से अभिषेक, छाया दान, काले तिल, कंबल और लोहे के बर्तन का दान, और शनि चालीसा का पाठ अत्यधिक शुभ माना गया है।

सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 5:28 से रात 7:51 बजे तक रहेगा, जिसमें कोई भी महत्वपूर्ण कार्य जैसे संपत्ति क्रय, वाहन खरीदना, जॉब इंटरव्यू, व्यापारिक निर्णय, निवेश आदि किया जा सकता है। रवि योग भी इसी अवधि में सक्रिय रहेगा, जो शनि की पूजा को और अधिक शक्तिशाली बनाता है।

राहुकाल सुबह 8:57 से 10:41 बजे तक रहेगा, इस दौरान कोई भी शुभ कार्य न करें। दुर्मुहूर्त सुबह 5:28 से 7:20 बजे तक रहेगा, इस समय भी पूजा-पाठ टालें।

आज के दिन शनि स्तोत्र, शनि चालीसा, शनि आरती का पाठ और शमी पत्र तथा काले गुलाब जामुन का भोग अर्पित करना श्रेष्ठ माना गया है। शनि देव की आंखों में सीधे न देखने की परंपरा भी निभाएं। इन उपायों से साढ़ेसाती, ढैय्या या किसी शनि दोष में अप्रत्याशित लाभ होगा।

शनि देव की आंखों में क्यों नहीं देखना चाहिए? जानिए पौराणिक कथा

शनि देव, जिन्हें न्याय के देवता और कर्म फल दाता कहा जाता है, का स्वभाव अत्यंत गंभीर और क्रोधित बताया गया है। मान्यता है कि अगर इनकी पूजा में जरा सी भी त्रुटि हो जाए, तो साधक को इसका दंड अवश्य भोगना पड़ता है। खासकर शनि देव की आंखों में सीधा देखने की मनाही का एक प्रचलित पौराणिक कारण है, जो उनकी पत्नी के श्राप से जुड़ा हुआ है।

कथा के अनुसार एक बार शनि देव भगवान श्री कृष्ण की भक्ति में लीन थे। उनकी पत्नी पुत्र प्राप्ति की कामना से उनके पास आईं। लेकिन शनि देव इतने तल्लीन थे कि उनकी ओर देखा तक नहीं। इस उपेक्षा से उनकी पत्नी बहुत आहत और क्रोधित हो गईं। आक्रोश में उन्होंने शनि देव को श्राप दे दिया कि “अब से तुम्हारी दृष्टि जिसे भी पड़ेगी, वह विनष्ट हो जाएगा।”

यही कारण है कि पूजा करते समय शनि देव की आंखों में सीधे नहीं देखा जाता। माना जाता है कि उनकी दृष्टि अत्यंत अशुभ और विनाशकारी हो जाती है। इसी वजह से महिलाएं शनि देव को तेल अर्पित नहीं कर सकतीं। यह भी कहा जाता है कि अगर कोई व्यक्ति शनि की मूर्ति के नेत्रों में देख ले तो उसे शनि के प्रकोप और कष्ट का सामना करना पड़ सकता है।

इसलिए शनि पूजा करते समय कुछ नियमों का कड़ाई से पालन करना जरूरी होता है – जैसे चेहरे को झुकाकर पूजा करना, नेत्रों में दृष्टि न डालना, और श्रद्धा से स्तुति करना। यह आस्था शनि उपासना में विशेष महत्व रखती है और साधक को अनिष्ट से बचाती है।

आज का पंचांग (5 जुलाई 2025)

दिन: शनिवार
पक्ष: शुक्ल
तिथि: दशमी – शाम 06:58 बजे तक, उसके बाद एकादशी
नक्षत्र: स्वाति – रात 07:51 बजे तक, फिर विशाखा
करण: तैतिल – सुबह 05:45 बजे तक, फिर गर – 06:58 बजे तक, उसके बाद वणिज
योग: सिद्ध – रात 08:36 बजे तक, फिर साध्य
चंद्र राशि: तुला
दिशाशूल: पूर्व


आज के शुभ योग व मुहूर्त

सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 05:28 से रात 07:51 बजे तक
रवि योग: सुबह 05:28 से रात 07:51 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त: 04:08 से 04:48 एएम
अभिजीत मुहूर्त: 11:58 एएम से 12:53 पीएम
विजय मुहूर्त: 02:45 पीएम से 03:40 पीएम


चौघड़िया मुहूर्त (दिन और रात)

दिन के शुभ चौघड़िया:

  • शुभ: 07:13 एएम – 08:57 एएम

  • चर: 12:26 पीएम – 02:10 पीएम

  • लाभ: 02:10 पीएम – 03:54 पीएम

  • अमृत: 03:54 पीएम – 05:39 पीएम

रात के शुभ चौघड़िया:

  • लाभ: 07:23 पीएम – 08:39 पीएम

  • शुभ: 09:54 पीएम – 11:10 पीएम

  • अमृत: 11:10 पीएम – 12:26 एएम (6 जुलाई)

  • चर: 12:26 एएम – 01:42 एएम (6 जुलाई)

  • लाभ: 04:13 एएम – 05:29 एएम (6 जुलाई)


अशुभ समय

  • राहुकाल: 08:57 एएम – 10:41 एएम

  • यमगण्ड: 02:10 पीएम – 03:54 पीएम

  • गुलिक काल: 05:28 एएम – 07:13 एएम

  • दुर्मुहूर्त: 05:28 एएम – 07:20 एएम


शनि पूजा और शनिवार व्रत विशेष

आज शनि पूजा के लिए अत्यंत शुभ दिन है। सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग दोनों एक साथ बनने से शनि व्रत और पूजन का फल कई गुना अधिक मिलता है।
क्या करें:

  • शनि मंदिर में जाकर सरसों के तेल से अभिषेक करें

  • काले तिल, काले कपड़े, काला छाता, स्टील के बर्तन, जूते, कंबल आदि का दान करें

  • छाया दान अवश्य करें: कटोरे में तेल भरकर चेहरा देखें और उसे दान करें

  • शनि स्तोत्र, शनि चालीसा का पाठ और शनि आरती करें

  • शमी के पत्ते और काले गुलाब जामुन का भोग लगाएं

  • शनि देव की आंखों में सीधा न देखें