➤ वडोदरा में महिसागर नदी पर बना चार दशक पुराना पुल अचानक ढहा
➤ चार वाहन नदी में गिरे, अब तक 9 की मौत और कई घायल
➤ लोगों ने पहले भी दी थी चेतावनी, सरकार पर लापरवाही का आरोप
गुजरात के वडोदरा जिले में बुधवार सुबह एक बड़ा हादसा हुआ, जब महिसागर नदी पर बना चार दशक पुराना गंभीरा पुल अचानक ढह गया। यह पुल वडोदरा और आणंद जिलों को जोड़ता है और रोजाना हजारों वाहन इस पर से गुजरते हैं। हादसे के समय पुल पर मौजूद चार वाहन नदी में जा गिरे, जिनमें दो ट्रक, एक बोलेरो एसयूवी और एक पिकअप वैन शामिल हैं। अब तक 9 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 6 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। हादसा बुधवार सुबह करीब 7:30 बजे हुआ।
#WATCH | Vadodara, Gujarat | The Gambhira bridge on the Mahisagar river, connecting Vadodara and Anand, collapses in Padra; local administration present at the spot. pic.twitter.com/7JlI2PQJJk
— ANI (@ANI) July 9, 2025
वडोदरा कलेक्टर अनिल धमेलिया ने बताया कि हादसे के बाद फौरन स्थानीय तैराकों, नाविकों और नगर निगम की टीमों को मौके पर भेजा गया। इसके साथ ही NDRF, पुलिस और बम निरोधक दस्तों को भी रेस्क्यू ऑपरेशन में लगाया गया। अब तक बचाव कार्य जारी है और नदी में तलाश अभियान तेज कर दिया गया है।
900 मीटर लंबा यह पुल वर्ष 1985 में बना था और इस पर समय-समय पर मरम्मत का कार्य होता रहा है। हादसे की असली वजह का पता लगाने के लिए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने तकनीकी विशेषज्ञों की टीम को मौके पर भेजने के आदेश दिए हैं। घटनास्थल पर पहुंचे अधिकारियों ने बताया कि पुल का एक स्लैब दो खंभों के बीच से टूटकर नीचे गिरा, जिससे वाहन नदी में समा गए। वीडियो में टैंकर और बाइक लटके हुए दिखाई दे रहे हैं, जो इस भयावह हादसे की गंभीरता को दिखाते हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुल टूटने से पहले एक तेज आवाज आई, जिसके बाद अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोग भी फौरन बचाव कार्य में जुट गए और घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। कुछ ने बताया कि इस पुल को लेकर पहले भी चेतावनियाँ दी गई थीं कि इसकी हालत जर्जर हो चुकी है। फिर भी प्रशासन ने मरम्मत पर कोई ध्यान नहीं दिया।
कांग्रेस नेता अमित चावड़ा ने घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि यह सरकार की लापरवाही का नतीजा है। उन्होंने कहा कि सरकार को पहले ही इस पुल की मरम्मत करवानी चाहिए थी। चावड़ा ने राज्य के सभी पुलों का ऑडिट कर फिटनेस प्रमाणपत्र सार्वजनिक करने की मांग की है।
गंभीरा पुल न सिर्फ यातायात की दृष्टि से महत्वपूर्ण था, बल्कि इस पर आत्महत्या जैसी कई घटनाएं भी हो चुकी हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों का गुस्सा और चिंता दोनों जायज़ हैं। सरकार पर लगातार यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या समय पर चेतावनियों को अनसुना कर लोगों की जान खतरे में डाली गई?
यह हादसा मोरबी पुल त्रासदी की याद दिला रहा है, जिसमें भी समय रहते मरम्मत नहीं कराए जाने के कारण दर्जनों लोगों की जान गई थी। इस बार भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या इतिहास खुद को दोहरा रहा है और क्या सरकारी तंत्र की निष्क्रियता एक और बड़ी त्रासदी का कारण बन गई है?



