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हिमाचल में फोरलेन के खिलाफ गरजे लोग, NHAI को घेरा

फोरलेन निर्माण से प्रभावित लोगों ने NHAI कार्यालय के बाहर किया जोरदार प्रदर्शन
कंपनियों पर अवैज्ञानिक कटिंग, अवैध माइनिंग और मुआवजे में लापरवाही के गंभीर आरोप
हिमाचल किसान सभा ने चेताया – राज्यव्यापी आंदोलन की होगी शुरुआत


दूसरा – विस्तृत खबर पूरी क्षमता से, लंबी हो, कंटेंट पूरा हो, मुख्य वर्ड वर्डप्रेस में बोल्ड
हिमाचल प्रदेश में फोरलेन निर्माण कार्यों की अव्यवस्था और प्रभावित परिवारों की अनदेखी को लेकर आज चक्कर स्थित NHAI कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन हुआ। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में स्थानीय प्रभावित लोग, हिमाचल किसान सभा और सीटू के कार्यकर्ता शामिल हुए। लोगों ने NHAI, गावर कंस्ट्रक्शन कंपनी और भारत सिंगला कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए।

हिमाचल किसान सभा के अध्यक्ष कुलदीप तंवर ने कहा कि NHAI ने कंट्रोल विड्थ से बाहर हजारों लोगों की संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया है लेकिन उनके लिए मुआवजे का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि फोरलेन निर्माण में शामिल कंपनियाँ किसी भी नियमन का पालन नहीं कर रहीं और निर्माण से पहले या बाद में स्थानीय लोगों को सुरक्षित पुनर्वास देने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।

तनवर ने बताया कि अब तक हजारों लोगों के घरों में दरारें आ चुकी हैं, कई इमारतें गिरने के कगार पर हैं और लोग भय के साये में जीवन यापन कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनियों ने स्थानीय युवाओं को 80% रोजगार देने का वादा किया था लेकिन वह भी सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहा। इसके अलावा अवैध माइनिंग, अवैज्ञानिक कटिंग, और अनियोजित डंपिंग के कारण न केवल पर्यावरण को हानि पहुँची है बल्कि कई स्थानीय बस्तियाँ भी खतरे में आ गई हैं।

प्रभावित लोगों ने बताया कि जब इमारतें गिर गईं तो कंपनी ने उन्हें एक कमरे में रहने का विकल्प दिया, लेकिन वास्तविक मुआवजा आज तक नहीं मिला। कई परिवार किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं क्योंकि उनकी अनसेफ बिल्डिंग को खाली करा दिया गया है। उनका आरोप है कि कंपनियों और NHAI ने मिलकर उन्हें बेबसी और नुकसान की हालत में छोड़ दिया है

हिमाचल किसान सभा ने ऐलान किया कि आने वाले दिनों में यह आंदोलन पूरे प्रदेश में फैलाया जाएगा। 7 अगस्त तक विभिन्न जिलों में मीटिंग्स और जनजागरण अभियान चलाए जाएँगे और राज्य स्तर पर एक बड़ा अधिवेशन आयोजित किया जाएगा ताकि फोरलेन निर्माण से प्रभावित लोगों की आवाज को नीति-निर्धारकों तक पहुँचाया जा सके