➤ 2 दिसंबर 2003 के बाद नियमित अनुबंध शिक्षकों से पेंशन और वेतन वृद्धि लाभ वापस
➤ स्कूल शिक्षा निदेशालय ने पुराने आदेश किए रद्द, नया अधिनियम हुआ प्रभावी
➤ सेवा लाभ अब केवल नियमित नियुक्ति तिथि से लागू, अनुबंध सेवा अवधि अमान्य
हिमाचल प्रदेश में 2 दिसंबर 2003 के बाद नियमित हुए अनुबंध शिक्षकों को पेंशन और वेतन वृद्धि जैसे सेवा लाभ अब नहीं मिलेंगे। इस निर्णय से हजारों शिक्षकों को बड़ा झटका लगा है। स्कूल शिक्षा निदेशालय ने शुक्रवार को एक आधिकारिक आदेश जारी करते हुए यह स्पष्ट किया कि मार्च 2005 में जारी पुराने कार्यालय आदेशों को निरस्त किया जा रहा है।
यह कार्रवाई सरकारी कर्मचारियों की भर्ती और सेवा शर्तें अधिनियम, 2024 के तहत की गई है। निदेशक आशीष कोहली के हस्ताक्षर से जारी आदेश में कहा गया है कि हाईकोर्ट के विभिन्न निर्णयों के अनुपालन में लिए गए पूर्व निर्णय अब नए अधिनियम के प्रभाव में निष्फल हो गए हैं।
नए नियम के अनुसार, सेवा लाभ जैसे पेंशन, वरिष्ठता, पदोन्नति और वेतन वृद्धि केवल उस तिथि से लागू होंगे जब कर्मचारी नियमित हुए हों। अनुबंध आधार पर दी गई सेवाओं को किसी भी रूप में सेवा लाभ के लिए गिना नहीं जाएगा।
इसका अर्थ यह है कि अब अनुबंध सेवा की अवधि को पेंशन या वेतन वृद्धि के हिसाब से मान्यता नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही कोर्ट के आदेशों के तहत पूर्व में मिले किसी भी लाभ को वापस लिया जा रहा है।
कार्मिक विभाग ने यह भी निर्देश जारी किया है कि नए अधिनियम के विपरीत की गई कोई भी कार्रवाई गंभीर मानी जाएगी और इसके लिए संबंधित नियुक्ति प्राधिकारी उत्तरदायी होंगे। इससे स्पष्ट है कि अब शिक्षकों को नियमितीकरण से पहले की सेवा अवधि का कोई वित्तीय लाभ नहीं मिलेगा, चाहे वे वर्षों तक अनुबंध पर क्यों न कार्यरत रहे हों।
यह निर्णय प्रदेश भर के उन शिक्षकों के लिए बड़ा झटका है, जिन्होंने वर्षों तक अनुबंध आधार पर सेवाएं दीं और नियमित होने के बाद सेवा लाभों की अपेक्षा की थी।



