➤ एचआरटीसी कर्मचारी पहली अगस्त से वर्क टू रूल के तहत सिर्फ 8 घंटे काम करेंगे
➤ वेतन, ओवरटाइम, डीए व एरियर न मिलने पर कर्मचारियों ने शुरू की गेट मीटिंग
➤ ड्राइवर व कंडक्टर यूनियन एकजुट, बस सेवाओं पर पड़ सकता है बड़ा असर
हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के कर्मचारियों ने सरकार और प्रबंधन की अनदेखी के खिलाफ एक अगस्त से वर्क टू रूल आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। इसका सीधा असर बस सेवाओं पर पड़ सकता है, क्योंकि कर्मचारी केवल नियमित 8 घंटे की ड्यूटी करेंगे।
यह ऐलान सरकाघाट में आयोजित गेट मीटिंग के दौरान किया गया, जिसमें कर्मचारियों ने जोरदार नारेबाजी की और निगम प्रबंधन के खिलाफ रोष व्यक्त किया। एचआरटीसी ड्राइवर यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष जीवन राणा ने कहा कि सरकार और प्रबंधन लगातार कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी कर रहे हैं।
उनका कहना था कि समय पर वेतन नहीं दिया जा रहा, ओवरटाइम का कोई भुगतान नहीं किया जा रहा और वित्तीय लाभ भी अटके हुए हैं। बरसात के इस खतरनाक मौसम में भी जब रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी होते हैं, तब भी एचआरटीसी के कर्मचारी जान जोखिम में डालकर सेवाएं देते हैं, लेकिन इसके बावजूद कोई समाधान नहीं किया गया।
1 अगस्त से आंदोलन की चेतावनी के साथ यह भी कहा गया कि 30 जुलाई तक पूरे प्रदेश में गेट मीटिंग की जाएंगी और यदि तब तक कोई समाधान नहीं हुआ तो कर्मचारी सिर्फ 8 घंटे काम करेंगे, यानी वर्क टू रूल लागू कर दिया जाएगा।
शिमला के पुराने बस अड्डे में भी शुक्रवार को कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। दोपहर 1 बजे ड्राइवर यूनियन ने गेट मीटिंग की और वरिष्ठ उपप्रधान रंजीत ठाकुर की अध्यक्षता में प्रदर्शन किया गया। कर्मचारियों का कहना है कि 2016 से एरियर का भुगतान नहीं हुआ, और 2018 से महंगाई भत्ता (डीए) भी नहीं मिला है।
उधर, राज्य एचआरटीसी कंडक्टर यूनियन की बैठक भी डीडीयू के पास एक निजी हॉल में हुई, जिसमें प्रांतीय अध्यक्ष जीवन सिंह, प्रधान प्रीत महिंद्र, मुख्य सलाहकार यशवंत सिंह ठाकुर और अन्य पदाधिकारी शामिल हुए। यूनियन ने स्पष्ट किया कि वह ड्राइवर यूनियन के संघर्ष का समर्थन करती है और 1 अगस्त से संयुक्त रूप से वर्क टू रूल के तहत कार्य किया जाएगा।
यह आंदोलन यदि लागू हुआ तो प्रदेश में एचआरटीसी की हजारों बस सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिससे आम जनता को गंभीर असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।



