➤ 28 से 31 जुलाई तक चार दिन लगातार होगी सुक्खू सरकार की कैबिनेट बैठक
➤ हर दिन अलग एजेंडा, आपदा प्रबंधन और राहत पैकेज पर रह सकती है गहन चर्चा
➤ मंडी-कुल्लू-किन्नौर के लिए विशेष रणनीति बन सकती है तैयार
हिमाचल प्रदेश में 28 जुलाई से 31 जुलाई तक चार दिन तक लगातार मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल बैठकें आयोजित की जाएंगी, जो राज्य में पहली बार इतना लंबा कैबिनेट सत्र माना जा रहा है। इस चार दिवसीय कैबिनेट मैराथन में सरकार राज्य में हुई आपदा, उसके प्रभावित जिलों, राहत एवं पुनर्वास नीति, और केंद्र से सहायता प्राप्त करने के प्रयासों जैसे मुद्दों पर गहन रणनीतिक विमर्श करेगी।
सूत्रों के अनुसार, हर दिन का एजेंडा अलग होगा और विभिन्न विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आपदा से जुड़े अपने-अपने विभागीय मसौदे, आंकड़े और संभावित समाधान तैयार रखें। खासकर मंडी, कुल्लू, शिमला, किन्नौर और चंबा जैसे जिलों में हुई भूस्खलन, बाढ़ और सड़क बंदी को लेकर विशेष समीक्षा होगी।
राजस्व, आपदा प्रबंधन, लोक निर्माण, जल शक्ति, स्वास्थ्य, शिक्षा और वित्त विभाग इस कैबिनेट का केंद्र बिंदु हो सकते हैं। राज्य सरकार आपदा प्रभावितों के लिए एक नया पुनर्वास मॉडल लाने पर भी विचार कर रही है, जिसमें स्थायी पुनर्निर्माण, भूमि पुनर्व्यवस्था और सामाजिक सहायता को प्राथमिकता मिलेगी।
कैबिनेट में नए राहत पैकेज, रोजगार सृजन, फसल नुकसान मुआवजा, और एनडीआरएफ-अनुदान को लेकर केंद्र से संवाद की रणनीति भी तैयार की जा सकती है। माना जा रहा है कि यह चार दिवसीय कैबिनेट सरकार की अब तक की सबसे नीति-निर्माता बैठक होगी, जिसका असर आने वाले बजट और केंद्र से मिलने वाली सहायता पर भी पड़ेगा।
प्रदेश में मानसून सीजन के दौरान 1436 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है, 150 से अधिक लोगों की जानें जा चुकी हैं और सैकड़ों मकान ध्वस्त हो चुके हैं। ऐसे में जनता को भी इस बैठक से बड़ी राहत की उम्मीद है।



