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किन्नर कैलाश यात्रा में दो श्रद्धालुओं की मौत, यात्रा स्थगित

किन्नर कैलाश यात्रा पर गए दो श्रद्धालुओं की मौत, यात्रा स्थगित
शिमला में चलती बस पर गिरा पेड़, लैंडस्लाइड से वाहन और दुकानें दबीं
चार जिलों में स्कूल बंद, 617 सड़कें अवरुद्ध, सतलुज में छोड़ा गया डैम का पानी


हिमाचल प्रदेश में मंगलवार रात से जारी भारी बारिश ने राज्य भर में जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। किन्नौर जिले में चल रही किन्नर कैलाश यात्रा में शामिल दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई है। जिला प्रशासन ने एहतियातन यात्रा को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है। अब तक मृतकों की पहचान नहीं हो सकी है, लेकिन घटना ने पूरे क्षेत्र में चिंता की लहर दौड़ा दी है।

बारिश के चलते किन्नर कैलाश ट्रैकिंग रूट पर जगह-जगह भूस्खलन और पगडंडियों के क्षतिग्रस्त होने से मंगलवार शाम तक 462 श्रद्धालु मिलिंग खट्टा और अन्य स्थानों पर फंस गए थे, जिन्हें आईटीबीपी के जवानों ने सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया है। इस राहत कार्य में स्थानीय प्रशासन, आपदा प्रबंधन टीमें, और पुलिस बल भी सक्रिय रहे।

प्रदेशभर में लैंडस्लाइड और पेड़ों के गिरने की घटनाओं ने यातायात व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। चंडीगढ़-मनाली फोरलेन, कालका-शिमला सड़क, और पठानकोट-कांगड़ा हाईवे पर भारी भूस्खलन के कारण वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद है। पूरे प्रदेश में 617 से अधिक सड़कें अवरुद्ध हो चुकी हैं, जिससे कई इलाकों में जनजीवन ठहर गया है।

शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शिमला, मंडी, कुल्लू के सात सब डिवीजन, और संपूर्ण सोलन जिला में सभी स्कूलों व कॉलेजों में अवकाश घोषित कर दिया गया है। शिमला शहर के चैल्सी, सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट, और सेंट एडवर्ड जैसे प्रमुख स्कूलों को भी बंद कर दिया गया है।

बद्दी के मानपुरा क्षेत्र में मानकपुर और दवनी औद्योगिक क्षेत्र को जोड़ने वाला पुल तेज बारिश से बह गया, जिससे उद्योगों की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था ठप हो गई है। कुल्लू के निरमंड उपमंडल के उर्टू गांव में नाले का जलस्तर बढ़ने और लैंडस्लाइड के कारण 5 वाहन और 6-7 दुकानें मलबे में दब गईं

शिमला के टुटू क्षेत्र में भी भूस्खलन के कारण 4 कारें क्षतिग्रस्त हो गईं। वहीं, सुबह छोटा शिमला सचिवालय के पास एक चलती बस पर पेड़ गिरने की घटना हुई। हालांकि सौभाग्यवश पेड़ का आधा हिस्सा केबल लाइन पर रुक गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया

इसी बीच सतलुज नदी पर बने कोल डैम से बुधवार सुबह 6:30 बजे पानी छोड़ा गया, जिससे नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। पंजाब प्रशासन ने इससे उत्पन्न संभावित बाढ़ खतरे को लेकर अलर्ट जारी कर दिया है।

राज्य में लगातार हो रही बारिश, पर्वतीय क्षेत्रों में निर्माण, और नदियों के किनारे की अनियोजित बसाहट ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने, नदियों के समीप न जाने, और स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।