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भारत-अमेरिका व्यापार तनाव के बीच पुतिन आएंगे भारत

पुतिन का भारत दौरा अब साल के अंत में संभावित
अमेरिका-भारत के बीच टैरिफ और ट्रेड पर तनाव बढ़ा
भारत-रूस साझेदारी से वैश्विक रणनीतिक संतुलन साधने की कोशिश


रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन  भारत  आ रहे हैं। दिसंबर में उनके आने की उम्‍मीद है। ऐसे में यदि दौरा हुआ तो यह एक द्विपक्षीय औपचारिकता नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक कूटनीति में एक बड़ा संकेत बनकर सामने  आएगा।  पहले यह यात्रा अगस्त 2025 के अंत तक प्रस्तावित थी, लेकिन अब इसे वर्ष के अंत तक टालने की संभावना जताई जा रही है।

इस दौरे की पृष्ठभूमि में भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता टैरिफ विवाद भी है। अमेरिका द्वारा कुछ भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ाने के जवाब में भारत ने भी कड़ा रुख अपनाया है। यह वही समय है जब भारत रूस के साथ अपने संबंधों को मज़बूत करके अमेरिका को एक राजनयिक संकेत दे सकता है।

विश्लेषकों की मानें तो भारत-पुतिन मुलाकात का केवल उद्देश्य रक्षा सौदे या ऊर्जा परियोजनाएं नहीं होंगे, बल्कि यह बैठक वैश्विक शक्ति संतुलन के नए अध्याय की नींव रख सकती है। पश्चिमी देशों के प्रभाव और अमेरिकी दबाव के बीच भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को प्रदर्शित करने की दिशा में कदम आगे बढ़ा रहा है

रूस के लिए भी यह यात्रा अत्यंत महत्वपूर्ण है। यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद रूस एशियाई देशों, विशेषकर भारत, चीन, और ईरान के साथ रिश्ते प्रगाढ़ करने में जुटा है। पुतिन की भारत में उपस्थिति यह स्पष्ट संदेश देगी कि रूस अब यूरोप की बजाय एशिया पर रणनीतिक ध्यान केंद्रित कर रहा है।

संभावना है कि इस यात्रा के दौरान रक्षा उपकरणों की आपूर्ति, ऊर्जा पाइपलाइनों, आर्कटिक सहयोग, और स्थानीय करेंसी में व्यापार जैसे महत्पूर्ण विषयों पर गहन बातचीत होगी। साथ ही, ब्रिक्स, एससीओ, जैसे बहुपक्षीय मंचों पर आपसी सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की संभावना प्रबल है।