➤ हिमाचल में ग्रामीण क्षेत्रों का पानी बिल अब पंचायतें वसूलेंगी
➤ ग्राम सभा से प्रस्ताव पारित होने के बाद दरें तय होंगी
➤ पानी योजनाओं के रखरखाव और संचालन का जिम्मा पंचायतों को
हिमाचल प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के बिल वसूलने और दरें तय करने का अधिकार अब पंचायतों को सौंप दिया है। प्रदेश सरकार का इस प्रक्रिया में कोई हस्तक्षेप नहीं होगा। नियम के अनुसार, पानी की दरें तय करने से पहले ग्राम सभा में प्रस्ताव लाना और पारित कराना अनिवार्य होगा। इसके बाद ही दरें लागू की जा सकेंगी।
पानी के बिल से प्राप्त राजस्व पंचायत के पास ही रहेगा, जिसका उपयोग पानी की योजनाओं के रखरखाव में किया जाएगा। अभी तक सरकार की ओर से कई पंचायतों में निःशुल्क पानी उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन आगे से नियमित जल आपूर्ति और उसका संचालन पंचायत के जिम्मे होगा।
जल शक्ति विभाग इस मामले में कोई दखल नहीं देगा। पानी की सप्लाई के प्रमाण के लिए सप्लाई देने वाले कर्मचारियों को प्रधान से हस्ताक्षर करवाने होंगे, ताकि रिकॉर्ड में साफ रहे कि किस दिन किस वार्ड में पानी दिया गया। अगर किसी वार्ड में सप्लाई नहीं होती, तो उसका समाधान भी पंचायत को ही करना होगा।
सरकार ने जल शक्ति विभाग की पेयजल योजनाओं के संचालन और मरम्मत का जिम्मा भी पंचायतों को सौंप दिया है। इसके लिए 354 करोड़ रुपये की राशि पंचायतों को जारी की जाएगी। जल स्रोतों के संरक्षण और प्रबंधन में भी पंचायतों को अधिक अधिकार मिलेंगे, जिसमें जियो टैगिंग के जरिए स्रोतों का रिकॉर्ड रखा जाएगा।
योजना के तहत जल रक्षक टैंकों की सफाई करेंगे, जबकि पानी की सप्लाई का कार्य बेलदार या कीमैन के जिम्मे रहेगा। पंचायतें आय बढ़ाने के लिए मासिक पानी के बिल जारी कर सकती हैं। ग्राम सभा से प्रस्ताव पारित करने के बाद मासिक बिल की राशि तय करना पूरी तरह पंचायतों पर निर्भर होगा।
ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि यह कदम पंचायतों को स्वावलंबी बनाने और जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए उठाया गया है।



