Follow Us:

युग हत्याकांड: फांसी की सजा पर हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

➤ युग हत्याकांड में फांसी की सजा की पुष्टिकरण पर सुनवाई पूरी
➤ दोषियों की अपील पर भी विशेष खंडपीठ ने फैसला सुरक्षित रखा
➤ अब हिमाचल हाईकोर्ट के अंतिम फैसले का इंतजार



हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में बहुचर्चित युग हत्याकांड के दोषियों को दी गई फांसी की सजा की पुष्टिकरण और दोषियों की अपील पर आज सुनवाई पूरी हो गई है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश राकेश कैंथला की विशेष खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह मामला सत्र न्यायाधीश शिमला द्वारा सजा के आदेशों की पुष्टि के लिए रेफरेंस के रूप में हाईकोर्ट भेजा गया था, वहीं दोषियों ने भी अपनी दोष सिद्धि के खिलाफ अपील दायर की थी।

मामला बेहद निर्मम हत्या का है। 14 जून 2014 को शिमला के राम बाजार से 4 साल के मासूम युग का अपहरण कर लिया गया था। फिरौती के लिए यह कदम उठाने वाले दोषियों चंद्र शर्मा, तेजिंद्र पाल और विक्रांत बख्शी ने बच्चे को बंधक बनाने के बाद उसकी निर्दयी हत्या कर दी थी। अगस्त 2016 में भराड़ी के पेयजल टैंक से युग का कंकाल बरामद हुआ, जहां उसे पत्थर बांधकर जिंदा पानी में फेंका गया था।

जांच में पता चला कि अपराधियों ने युग के पिता से साढ़े तीन करोड़ रुपये की फिरौती की मांग की थी। इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया और न्याय की मांग को लेकर शिमला और हिमाचल भर में कैंडल मार्च और प्रदर्शन हुए।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश शिमला ने 6 सितंबर 2018 को तीनों आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई थी। न्यायालय ने इस घटना को दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी में रखा। इस मामले की जांच सीआईडी ने की और ट्रायल 20 फरवरी 2017 से शुरू होकर मात्र साढ़े 10 माह में ही समाप्त हुआ। 135 गवाहों में से 105 के बयान दर्ज किए गए। अब, हाईकोर्ट का अंतिम फैसला ही तय करेगा कि यह फांसी की सजा बरकरार रहेगी या बदलेगी।