➤ आरएस बाली ने भारी बिजली बिल पर खोला सच, बोले– विभाग की गलती से छवि खराब हुई
➤ 170 स्ट्रीट लाइट्स का बिल तक खुद चुकाते हैं, सरकार को सालाना 1.75 करोड़ निजी टैक्स भी देते हैं
➤ बोले– आगे से अपने सरकारी आवास का बिजली बिल भी निजी तौर पर भरेंगे
पराक्रम चंद, शिमला
हिमाचल प्रदेश में बिजली के बिलों को लेकर इन दिनों सियासी गलियारों से लेकर विधानसभा तक में चर्चा जोरों पर है। यह मामला तब सामने आया जब भाजपा विधायक सुधीर शर्मा और केवल सिंह पठानिया ने बिजली सब्सिडी छोड़ने को लेकर सदन में सवाल पूछा। इसका जवाब सामने आते ही हैरान करने वाले खुलासे हुए। पता चला कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के शिमला स्थित सरकारी आवास ‘ओक ओवर’ का एक साल का बिजली बिल लाखों में है। सरकार ने 14 महीने में मुख्यमंत्री के सरकारी आवास के बिजली बिल के तौर पर 3 लाख 76 हज़ार 174 रुपए अदा किए। इसके अलावा, कैबिनेट मंत्रियों के बिलों को भी जोड़ा जाए तो कुल रकम 14 महीने में 17 लाख 95 हज़ार 879 रुपए के करीब बनती है।
सबसे अधिक बिजली बिल कैबिनेट रैंक प्राप्त एचपीटीडीसी के चेयरमैन आरएस बाली का आया, जिसने इस पूरे मामले को एक नया मोड़ दिया। उनका बिजली बिल 6 लाख 78 हज़ार 892 रुपए है, जो कि मुख्यमंत्री के बिल से भी कहीं ज्यादा है। इस पर आरएस बाली ने सदन में प्वाइंट ऑफ ऑर्डर के तहत इस मामले को उठाया। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि या तो बिजली विभाग के स्तर पर बिल देने में गलती हुई है या फिर किसी ने जानबूझ कर ऐसा किया है, जिसकी गहनता से जांच होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने बिजली विभाग से बात की तो पता चला कि उनको 1.68 लाख की जगह गलती से 6.78 लाख का बिल जारी हुआ है। इसी तरह, ओक ओवर में भी बिल 1.47 लाख की जगह 3.76 लाख रुपए का दिया गया है। बाली ने कहा कि इस गलत बिल की वजह से उनकी छवि को नुकसान पहुंचा है और अब से वे अपने सरकारी आवास का बिल निजी तौर पर अदा करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि वे निजी तौर पर सरकार को सालाना एक करोड़ 75 लाख रुपए अदा करते हैं और अपने क्षेत्र की 170 स्ट्रीट लाइट्स का बिल भी खुद भरते हैं।
मामले के तूल पकड़ने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को सामने आना पड़ा। उन्होंने बताया कि कुछ मंत्रियों को 14 महीने का बिजली बिल ज्यादा थमाया गया है। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि रघुवीर सिंह बाली (आरएस बाली) का बिल 6 लाख रुपये से अधिक का आया है, जबकि वह शिमला में ज्यादा रहते भी नहीं हैं। भविष्य में उपभोक्ताओं को सही बिल मिले, इसके लिए स्मार्ट व प्री-पेड मीटर लगाए जाएंगे। साथ ही, बिलों में कहां खामियां रही हैं, इसकी जांच भी करवाई जाएगी।



