➤ विधानसभा में डॉ. यशवंत सिंह परमार को भारत रत्न देने का संकल्प पारित
➤ कांग्रेस-भाजपा के नेताओं ने एकजुट होकर की पैरवी, केंद्र सरकार को भेजा जाएगा प्रस्ताव
➤ डीए और गलत बिजली बिल के मुद्दे पर सदन में हंगामा, विपक्ष का वॉकआउट
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान प्रदेश के निर्माता और पहले मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार को भारत रत्न देने की जोरदार मांग उठी। नाहन से कांग्रेस विधायक अजय सोलंकी ने प्राइवेट मेंबर डे पर यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि डॉ. परमार का योगदान केवल हिमाचल ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए अमूल्य है। उनके प्रयासों से 30 रियासतों का विलय हुआ और 15 अप्रैल 1948 को हिमाचल प्रदेश का गठन संभव हुआ।
अजय सोलंकी के बाद डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री, मंत्री हर्षवर्धन चौहान, जगत सिंह नेगी, पूर्व भाजपा मंत्री सुखराम चौधरी, विधायक हंसराज, रीना कश्यप समेत 11 नेताओं ने डॉ. परमार को भारत रत्न देने की पुरजोर पैरवी की। सदन ने ध्वनिमत से यह संकल्प पारित किया और विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
डॉ. परमार का जीवन और योगदान
4 अगस्त 1906 को सिरमौर जिले में जन्मे डॉ. परमार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेता रहे। 1952 से 1956 तक और फिर 1963 से 1977 तक वे हिमाचल के मुख्यमंत्री रहे। उनके प्रयासों से प्रदेश को 25 जनवरी 1971 को पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ। उन्हें हिमाचल के विकास की नींव रखने वाला जननायक कहा जाता है।
सदन में हंगामा
विधानसभा की कार्यवाही के दौरान डीए (महंगाई भत्ता) को लेकर विपक्ष ने हंगामा किया। बीजेपी विधायक सतपाल सत्ती के सवाल पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने जवाब देते हुए कहा कि आर्थिक हालात सुधरते ही डीए दिया जाएगा। लेकिन नाराज विपक्ष ने वेल में आकर नारेबाजी की और वॉकआउट कर दिया। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार ने बजट में वादा करने के बावजूद डीए नहीं दिया।
बिजली बिल विवाद
नगरोटा बगवां से कांग्रेस विधायक आरएस बाली ने अपने सरकारी आवास का 6.78 लाख रुपए का बिजली बिल आने का मामला सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि यह बिल गलत है और सोशल मीडिया पर प्रचारित होने से उनकी छवि धूमिल हुई। मुख्यमंत्री सुक्खू ने भी स्वीकार किया कि हकीकत में बिल 1.68 लाख रुपए था, जबकि अधिकारियों ने पिछले वर्षों का एरियर जोड़कर गलत आंकड़े दिए। विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि गलत जानकारी देने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।



