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दिल्‍ली में बैठ CM ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए लिया आपदा प्रबंधन का जायज़ा, कहा-हर श्रद्धालु और पर्यटक को सुरक्षित पहुंचाना प्राथमिकता

➤ मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पांच जिलों की आपदा समीक्षा बैठक ली
➤ फंसे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुरक्षित निकालने के दिए निर्देश
➤ सड़क, बिजली, पानी और संचार सेवाओं को बहाल करने पर जोर


हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज नई दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चंबा, कुल्लू, लाहौल-स्पीति, कांगड़ा और मंडी जिलों की आपदा स्थिति की समीक्षा की। इस बैठक में उन्होंने संबंधित डिविजनल कमिश्नर, डिप्टी कमिश्नर और एसपी से विस्तृत जानकारी ली और खासतौर पर मणिमहेश यात्रा में फंसे श्रद्धालुओं की सुरक्षा और राहत कार्यों पर चर्चा की।

मुख्यमंत्री को बताया गया कि सभी फंसे श्रद्धालु सुरक्षित हैं और उनके लिए भोजन, आश्रय, प्राथमिक उपचार और सुरक्षा की उचित व्यवस्था की गई है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भ्रमौर और चंबा क्षेत्र में संचार सेवाओं को तत्काल बहाल किया जाए, ताकि लोग अपने परिजनों से संपर्क कर सकें। साथ ही, चंबा चौगान में ठहरे यात्रियों को सुरक्षित रूप से उनके घरों तक पहुंचाने के भी निर्देश दिए।

बैठक में जानकारी दी गई कि जियो, एयरटेल और बीएसएनएल सेवाएं चंबा शहर में बहाल हो चुकी हैं और चंबा से भ्रमौर तक 25 किलोमीटर सड़क भी खोल दी गई है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर महिलाओं, बच्चों और बीमार श्रद्धालुओं को निकालने के निर्देश दिए। उन्होंने बीमार और बुजुर्गों को एयरलिफ्ट करने तथा दुर्गम स्थानों पर एयरड्रॉप से भोजन सामग्री पहुंचाने के आदेश भी दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क बहाली, पेयजल और बिजली आपूर्ति पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर तैनात करने, अतिरिक्त मशीनरी और जनशक्ति लगाने तथा चरणबद्ध तरीके से सड़कें खोलने के निर्देश दिए।

लाहौल-स्पीति के डिप्टी कमिश्नर ने जानकारी दी कि सिस्सु में फंसे करीब 380 पर्यटकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है और कई जगहों पर बिजली आपूर्ति बहाल हो चुकी है। इसी तरह पठानकोट-चंबा मार्ग और कुल्लू-मंडी एनएच-03 पर छोटे वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्स्थापन कार्य युद्ध स्तर पर होने चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार हर प्रभावित व्यक्ति तक राहत पहुंचाने और सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उधर, हिमाचल प्रदेश में बारिश का कहर लगातार जारी है। मौसम विभाग ने अगले 18 घंटे के लिए 7 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। लगातार हो रही बरसात से हालात बेहद गंभीर हो चुके हैं। चंबा–भरमौर नेशनल हाइवे का कई मीटर हिस्सा रावी नदी की चपेट में आ गया है। इस वजह से हजारों यात्री अपनी गाड़ियां छोड़कर पैदल ही भरमौर से चंबा की ओर निकल रहे हैं।

आपदा के इस दौर में अब तक 11 लोगों की मौत, 8 घायल और 9 लोग लापता होने की खबर है। वहीं लाहौल-स्पीति जिले के एक गांव में पहाड़ दरकने से भारी हड़कंप मच गया। कुल्लू के आनी क्षेत्र में हुए लैंडस्लाइड में कई मकान इसकी चपेट में आ गए, जिसमें दो लोग लापता हो गए।

राज्य भर में भूस्खलन और बाढ़ से दो नेशनल हाइवे समेत 914 सड़कें बंद हो चुकी हैं। आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। 20 जून से अब तक प्रदेश में मानसून की मार से 317 लोगों की मौत, 374 लोग घायल और 40 लोग लापता हो चुके हैं।

वहीं, 925 ट्रांसफार्मर ठप होने से कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित है। 266 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं जिससे हजारों लोगों को पानी के संकट का सामना करना पड़ रहा है। अब तक राज्य को 2774 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है और इस आपदा में 27,619 पशु-पक्षी बह चुके हैं

सरकार और प्रशासन राहत व बचाव कार्यों में जुटे हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश इन कार्यों में बड़ी चुनौती बनी हुई है।