➤ हिमाचल विधानसभा में नगर परिषद व नगर निगम संशोधन विधेयक पारित
➤ नए निकाय चुनाव अब दो साल तक टल सकेंगे
➤ बीजेपी ने विरोध जताया, अदालत में चुनौती की बात कही
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में शुक्रवार को नगर परिषद और नगर निगम संशोधन विधेयक ध्वनिमत से पारित हो गया। इस विधेयक के बाद प्रदेश सरकार अब नवगठित नगर निकायों के चुनाव दो साल तक टाल सकेगी। गौरतलब है कि इस साल सरकार ने हमीरपुर, ऊना और बद्दी में नगर निगम और तीन नगर परिषदें बनाई थीं। ऐसे में दिसंबर में प्रस्तावित चुनाव अब स्थगित हो सकेंगे।
हालांकि, स्टेट इलेक्शन कमीशन पहले ही तैयारी शुरू कर चुका था। आरक्षण रोस्टर लगाने से लेकर वोटरों की मैपिंग के निर्देश जारी हो चुके थे। लेकिन अब नवगठित निकायों के गठन के दो साल बाद ही चुनाव कराए जाएंगे।
इस कदम का विपक्ष ने विरोध किया। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और बीजेपी विधायक राकेश जम्वाल व सतपाल सत्ती ने इसे अवैध बताते हुए अदालत में चुनौती देने की संभावना जताई।
सत्र के दौरान अधिकारियों-कर्मचारियों को एक्सटेंशन और री-इम्प्लायमेंट देने का मामला भी गूंजा। बीजेपी विधायकों ने सरकार पर जानकारी छिपाने और गलत प्राथमिकताएं तय करने का आरोप लगाया। सतपाल सिंह सत्ती ने कहा कि जब पेंशन और वेतन समय पर नहीं दिए जा पा रहे, तो अधिकारियों को एक्सटेंशन क्यों दी जा रही है।
इस पर डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने जवाब दिया कि जानकारी एकत्र करने में समय लगेगा, लेकिन जैसे ही यह पूरी होगी, सदन को दी जाएगी। उन्होंने माना कि एचआरटीसी पेंशन में कुछ देरी हुई थी, मगर आश्वासन दिया कि कांग्रेस सरकार नियमित भुगतान सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी बताया कि 29 अगस्त को सभी एचआरटीसी कर्मचारियों की पेंशन जारी कर दी गई है।
वहीं, संस्थान बंद करने के मुद्दे पर भी विपक्ष और सरकार के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार का काम केवल पूर्व सरकार द्वारा खोले संस्थानों को बंद करना रह गया है।



