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बाधाएं होंगी दूर, भक्ति और सौभाग्य मिलेगा राधा अष्टमी व्रत से

भाद्रपद शुक्ल अष्टमी पर आज धूमधाम से मनाई जा रही है राधा अष्टमी
मथुरा-बरसाना में विशेष आयोजन, श्रद्धालु कर रहे राधा-कृष्ण पूजन और व्रत
व्रत-पूजन से विवाह बाधाएं दूर होती हैं, भक्ति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है


आज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर श्रद्धालु पूरे उत्साह और भक्ति भाव से राधा अष्टमी का पर्व मना रहे हैं। मान्यता है कि इसी दिन श्रीकृष्ण की प्रियतम राधारानी का प्राकट्य हुआ था। शास्त्रों में उल्लेख है कि बिना राधा नाम के कृष्ण का नाम भी अधूरा है, इसलिए राधा रानी की पूजा से ही भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है।

ब्रजभूमि के मथुरा और बरसाना में इस पर्व का विशेष महत्व है। मंदिरों में भव्य सजावट की गई है और पूरे क्षेत्र में भक्ति की गूंज सुनाई दे रही है। हजारों श्रद्धालु राधा-कृष्ण के दर्शन कर व्रत और पूजन कर रहे हैं।

राधा अष्टमी का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन व्रत-पूजन करने से विवाह संबंधी बाधाएं समाप्त होती हैं, दांपत्य जीवन सुखी होता है और जीवन में धन, सौभाग्य और सम्मान की वृद्धि होती है। शास्त्र कहते हैं कि जो व्यक्ति कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत करता है, उसे राधा अष्टमी का व्रत अवश्य करना चाहिए, अन्यथा व्रत अधूरा माना जाता है।

शुभ योग और मुहूर्त
इस बार राधा अष्टमी पर कई शुभ संयोग बन रहे हैं। सूर्य सिंह राशि में और चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेंगे। सिंह राशि में केतु, सूर्य और बुध की युति से त्रिग्रही योग तथा बुधादित्य योग बन रहा है।

  • पूजन का समय: सुबह 11:05 से दोपहर 01:38 तक (करीब ढाई घंटे)

  • अभिजीत मुहूर्त: 11:56 से 12:47 तक

  • राहुकाल: 09:10 से 10:46 तक

राधा अष्टमी पूजा विधि
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और पीले/लाल वस्त्र धारण करें। व्रत का संकल्प लें। चौकी पर पीला या लाल वस्त्र बिछाकर राधा-कृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। दीपक जलाकर ध्यान करें, फिर पंचामृत से स्नान कराएं (प्रतिमा हो तो जल छिड़कें)। उन्हें फूल, वस्त्र, माला, सिंदूर और कुमकुम अर्पित करें।

भोग में राधा रानी को अरबी की सब्जी, रबड़ी, केसर वाली खीर, मौसमी फल, मालपुए और पंचामृत अर्पित करें। इसके बाद आरती करें और “राधे-राधे” नाम का जप करें। दिनभर फलाहार या जल से व्रत रखें और संध्या को कथा-भजन करने के बाद दान देकर व्रत पूरा करें।

राधा मंत्र

  • बीज मंत्र: ॐ राधायै नमः॥

  • कृष्ण-प्रिय मंत्र: ॐ श्री कृष्णप्रिये राधायै नमः॥

  • भक्ति मंत्र: राधे राधे जपते रहो, कृष्ण मिले स्वतः॥

इन मंत्रों का 108 बार जप विशेष फल देता है।

निष्कर्ष
राधा अष्टमी सिर्फ पर्व नहीं, बल्कि प्रेम और समर्पण की पराकाष्ठा का प्रतीक है। इस दिन व्रत-पूजन करने से श्रद्धालुओं को न केवल सांसारिक सुख मिलते हैं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति भी होती है।