➤ मणिमहेश यात्रा के दौरान डल झील का जलस्तर अचानक बढ़ा
➤ पानी के तेज बहाव से परिक्रमा मार्ग, पुल और लंगर तबाह
➤ कई श्रद्धालु परिवार बिछड़े, जनहानि और तबाही से दहशत
मणिमहेश यात्रा के दौरान 24 अगस्त की सुबह श्रद्धालुओं के लिए भय और अफरातफरी का मंजर कभी न भूलने वाला साबित हुआ। सुबह करीब छह बजे से लगातार हो रही भारी बारिश ने डल झील का जलस्तर अचानक बढ़ा दिया। झील का उफान इतना जबरदस्त था कि परिक्रमा मार्ग पलक झपकते ही पानी में डूब गया और देखते ही देखते सैलाब का रूप लेकर तबाही मचाने लगा।
तेज बहाव ने गौरीकुंड, सुंदरासी, धन्छो, दोनाली और हड़सर तक बने पुल और पगडंडियों को बहा दिया। मार्ग पर लगी दुकानें और श्रद्धालुओं की सेवा में लगे लंगर भी पानी की धारा में समा गए। श्रद्धालुओं ने बताया कि यह मंजर इतना खौफनाक था कि हर कोई अपने परिवार को बचाने में जान जोखिम में डालते हुए सुरक्षित स्थानों की ओर भागा…..
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चंबा निवासी अभिषेक राजपूत ने बताया कि वह सेवा समिति द्वारा 23 अगस्त को करवाए गए यज्ञ में शामिल थे। 24 अगस्त को अचानक जलस्तर बढ़ने से परिक्रमा मार्ग जलमग्न हो गया और पानी नीचे की ओर सब कुछ बहाता चला गया। वापसी पर सिर्फ गौरीकुंड का पुल ही सुरक्षित मिला, बाकी जगह चारों ओर तबाही के निशान थे।
वहीं, इस आपदा ने कई परिवारों को ताउम्र का जख्म दे दिया। राजस्थान से आए संगम अपने भाई से बिछड़ गए और आठ दिन बीत जाने के बाद भी कोई सुराग नहीं मिला। जम्मू के श्रद्धालु राहुल शर्मा और सौरभ ठाकुर के माता-पिता और भाई-बहन पानी के तेज बहाव में बह गए। जम्मू की ही मोनिका अपनी बहन और जीजा से अलग हो गईं और प्रशासन से मदद की गुहार लगा रही हैं।
श्रद्धालुओं का कहना है कि प्राकृतिक आपदा ने उन्हें भयभीत जरूर किया, लेकिन भगवान की कृपा से जो लोग सुरक्षित लौट पाए, वे आभारी हैं। मणिमहेश यात्रा की यह सुबह हर श्रद्धालु की स्मृतियों में दहशत और दर्द की तस्वीर बनकर रह गई है।



