➤ कांगड़ा बैंक फंडिंग को लेकर विपक्ष का सदन में हंगामा, बीजेपी विधायक वॉकआउट
➤ भर्ती परीक्षा नकल कानून में 5 साल की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान
➤ पंचायतीराज संशोधन विधेयक के तहत आपराधिक छवि वाले लोग नहीं लड़ पाएंगे पंचायत चुनाव
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का आखिरी दिन बेहद हंगामेदार रहा। विपक्ष ने कांगड़ा बैंक से महिला मंडलों को दी गई धनराशि के मुद्दे पर सरकार को घेरा। बीजेपी विधायक आशीष शर्मा के सवाल का जवाब न मिलने पर विपक्ष ने सदन में नारेबाजी की और सप्लिमेंटरी की अनुमति नहीं मिलने पर वॉकआउट कर दिया।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि यह पहला मौका है जब किसी विधायक को अपने सवाल का जवाब पाने के लिए आरटीआई का सहारा लेना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि देहरा उपचुनाव के दौरान 66 महिला मंडलों के खातों में 50-50 हजार रुपये डाले गए, जो आचार संहिता का खुला उल्लंघन और भ्रष्टाचार का उदाहरण है। ठाकुर ने यह भी कहा कि महिलाओं को तीन महीने की 1500-1500 रुपये की किश्तें दी गईं, जिससे मुख्यमंत्री की पत्नी को चुनाव में फायदा हुआ।
इसी बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सदन में महत्वपूर्ण विधेयक प्रस्तुत किया। हिमाचल प्रदेश लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) विधेयक 2025 में अब नकल करने पर 5 साल की जेल और 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। वहीं अगर कोई सेवा प्रदाता नकल कराने में शामिल पाया गया तो उस पर एक करोड़ रुपये तक जुर्माना और 10 साल तक की सजा हो सकती है। यह सख्त कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि प्रदेश में हाल के वर्षों में भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक और नकल के मामलों में लगातार वृद्धि हुई है। हिमाचल स्टाफ सिलेक्शन कमीशन को भी इसी वजह से भंग करना पड़ा था।
इसके अलावा सदन में हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज संशोधन विधेयक भी लाया गया, जिसके पारित होने के बाद आपराधिक छवि वाले लोग पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। इस साल दिसंबर में पंचायत चुनाव होने हैं और यह संशोधन बेहद अहम माना जा रहा है।
सदन में अधिकारियों के विदेश दौरों और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग के मुद्दे पर भी गर्मा-गर्मी देखने को मिली। वहीं मुख्यमंत्री सुक्खू ने मानसून सत्र को तीन दिन और बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है ताकि सभी विधायकों को अपने सवाल पूछने का मौका मिल सके। इस पर फैसला स्पीकर विपक्ष और संसदीय कार्य मंत्री से चर्चा के बाद लेंगे।



