➤ भारी बारिश और भूस्खलन से हिमाचल में 1292 सड़कें बंद
➤ कुल्लू में भूस्खलन से छह लोग दबे, एक की मौत, रेस्क्यू जारी
➤ मानसून में अब तक 343 मौतें और 5319 मकान क्षतिग्रस्त
हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश और भूस्खलन से हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में छह नेशनल हाईवे सहित 1,292 सड़कें ठप हैं। साथ ही 2,809 बिजली ट्रांसफार्मर और 1,081 जल आपूर्ति योजनाएं प्रभावित होने से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

कुल्लू के इनर अखाड़ा बाजार में भूस्खलन से गुरुवार सुबह दो मकान मलबे में दब गए। इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि तीन लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। छह लोग अभी भी मलबे में दबे हैं, जिनमें एक महिला और पांच कश्मीरी मजदूर शामिल हैं। घटना स्थल पर एनडीआरएफ का रेस्क्यू अभियान जारी है। एडीसी कुल्लू और एसडीएम मौके पर हालात की निगरानी कर रहे हैं।

प्रदेश सरकार ने हालात को देखते हुए 7 सितंबर तक सभी सरकारी और निजी स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और तकनीकी संस्थानों को बंद रखने का आदेश जारी किया है। ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति ठप होने से ऑनलाइन कक्षाएं भी प्रभावित हो रही हैं।

मौसम विभाग शिमला ने चेतावनी दी है कि राज्य के कुछ हिस्सों में 10 सितंबर तक बारिश का दौर जारी रहेगा। बीती रात से कई स्थानों पर भारी बारिश दर्ज की गई है, जिसमें धर्मपुर, करसोग, कसौली और कंडाघाट प्रमुख हैं।
अब तक के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। मानसून सीजन में 20 जून से 3 सितंबर तक 343 लोगों की मौत हो चुकी है। 398 लोग घायल हुए और 43 लोग अब भी लापता हैं। इस अवधि में 5,319 मकान क्षतिग्रस्त, 4,244 गोशालाएं नष्ट और 1,908 पशुओं की मौत हो चुकी है। प्रदेश में अब तक 3,690 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का नुकसान दर्ज किया गया है।

सोलन जिले के धर्मपुर, ओच्छघाट और बहेड़ी क्षेत्र में भी भूस्खलन और चट्टानों के गिरने से मकानों को नुकसान पहुंचा है। वहीं, बिलासपुर में लगातार बारिश के चलते गोबिंद सागर झील कई साल बाद पूरी तरह भर गई है। यहां कोलडैम से पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात बन रहे हैं।
हालात गंभीर हैं और प्रदेश सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें।



