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डिजिटल अरेस्‍ट रख शिमला में सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी से 80 लाख की ठगी


शिमला में साइबर अपराधियों ने सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी को 80 लाख रुपये की ठगी का शिकार बनाया
ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा
इस साल हिमाचल में डिजिटल अरेस्ट के 5 केस, 2.42 करोड़ रुपये की ठगी दर्ज


हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां साइबर अपराधियों ने पुलिस अधिकारी बनकर एक सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी (75) को झांसे में ले लिया और उनसे पूरे 80 लाख रुपये की ठगी कर ली। अपराधियों ने वीडियो कॉल के जरिये खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए पीड़ित पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया और उनका आधार कार्ड दुरुपयोग होने की कहानी गढ़कर उन्हें डरा-धमकाया।

ठगों ने पीड़ित को यह यकीन दिलाने के लिए वीडियो कॉल पर कथित ऑनलाइन कोर्ट की कार्यवाही भी दिखाई और कहा कि वह एक गंभीर अपराध में फंस चुके हैं। इतना ही नहीं, अपराधियों ने पीड़ित बुजुर्ग को पूरे तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखा। इस दौरान उन्हें बाहर किसी से संपर्क करने से मना किया गया।

ठगों ने कहा कि मामले की जांच और वेरिफिकेशन के लिए उन्हें अपने बैंक खाते से रुपये ट्रांसफर करने होंगे, जो प्रक्रिया पूरी होने के बाद वापस कर दिए जाएंगे। भरोसा जताकर बुजुर्ग को धीरे-धीरे 80 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया।

जब पीड़ित से कहा गया कि वह अपने लोकल थाने से रिपोर्ट लेकर आएं, तब असलियत सामने आई। थाने पहुंचकर उन्होंने पूरी घटना बताई तो उन्हें साफ कर दिया गया कि वे साइबर ठगी के शिकार हो गए हैं। इसके बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। साइबर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि ठगों ने इसे किसी कॉल सेंटर जैसी सेटिंग से अंजाम दिया।

गौरतलब है कि जनवरी 2025 से अब तक प्रदेश में ऐसे 5 मामले दर्ज हो चुके हैं, जिनमें करीब 2.42 करोड़ रुपये की ठगी हो चुकी है। पुलिस ने लोगों को चेतावनी दी है कि वे किसी भी संदिग्ध कॉल या लिंक पर भरोसा न करें, केवल सुरक्षित एप्लिकेशन डाउनलोड करें और अपने ऑनलाइन खातों को टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन से सुरक्षित करें।

राज्य सीआईडी के उप पुलिस महानिरीक्षक मोहित चावला ने स्पष्ट किया कि कोई भी सरकारी एजेंसी या अधिकारी फोन या वीडियो कॉल पर कार्रवाई नहीं करता और न ही धन की मांग करता है। इसलिए लोगों को चाहिए कि वे किसी भी संदिग्ध वीडियो कॉल का जवाब न दें और अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें