हिमाचल प्रदेश सरकार के पंचायती राज विभाग ने आगामी पंचायत चुनावों के लिए आरक्षण का नया रोस्टर जारी कर दिया है। यह रोस्टर हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (निर्वाचन) द्वितीय संशोधन नियम, 2025 के तहत बनाया गया है, जो 18 अगस्त 2025 को राजपत्र में प्रकाशित हुआ था । इस नए रोस्टर के अनुसार, आरक्षित स्थानों और पदों की गणना नए सिरे से की जाएगी ।
ग्राम पंचायत सदस्यों का आरक्षण: ग्राम पंचायतों में सबसे पहले अनुसूचित जाति के लिए स्थान आरक्षित किए जाएंगे । ये स्थान पंचायत क्षेत्र में उनकी जनसंख्या के अनुपात में होंगे । आरक्षण के लिए वे वार्ड चुने जाएंगे जहां अनुसूचित जाति की जनसंख्या का प्रतिशत सबसे अधिक है और घटते क्रम में इसी प्रक्रिया को अपनाया जाएगा । यदि किसी वार्ड में अनुसूचित जाति की जनसंख्या 5% से कम है, तो वह वार्ड इस वर्ग के लिए आरक्षित नहीं होगा ।
पंचायत चुनावों को लेकर रोस्टर
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित स्थानों में से 50% स्थान इस वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे । महिलाओं के लिए आरक्षण की पहचान भी उनकी जनसंख्या के घटते प्रतिशत के आधार पर की जाएगी । इसके बाद, इसी प्रक्रिया के तहत अनुसूचित जनजाति के लिए स्थानों का आरक्षण किया जाएगा । ग्राम पंचायतों में पिछड़ा वर्ग के लिए कोई आरक्षण नहीं है ।
कुल स्थानों का 50% महिलाओं के लिए आरक्षित होगा, जिसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए आरक्षित पद भी शामिल हैं । सामान्य महिलाओं के लिए बचे हुए स्थानों का आरक्षण उनकी जनसंख्या के प्रतिशत के घटते क्रम में किया जाएगा ।
पंचायत समिति और जिला परिषद का आरक्षण: इन निकायों में आरक्षण का मूल सिद्धांत ग्राम पंचायत जैसा ही है । हालांकि, यहां पिछड़ा वर्ग के लिए भी आरक्षण का प्रावधान है । पिछड़ा वर्ग को उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण मिलेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 15% होगी । अगर किसी वार्ड में पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या 5% से कम है, तो वहां कोई आरक्षण नहीं होगा । पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित स्थानों में से 50% महिलाओं के लिए होंगे । महिलाओं के लिए कुल 50% स्थानों की गणना में सभी आरक्षित श्रेणियों की महिलाएं शामिल होंगी ।
प्रधानों और अध्यक्षों का आरक्षण: ग्राम पंचायत प्रधानों के पदों के आरक्षण के लिए विकास खंड को एक इकाई माना गया है । इन पदों का आरक्षण अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या के अनुपात में किया जाएगा । सबसे पहले अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण रोस्टर लागू होगा । जिन पंचायतों में इस वर्ग की जनसंख्या सबसे अधिक है, वहां प्रधान पद आरक्षित होंगे । यदि किसी पंचायत या पूरे विकास खंड में संबंधित वर्ग की जनसंख्या 5% से कम है, तो वहां कोई पद आरक्षित नहीं होगा ।
इसी तरह, पंचायत समिति अध्यक्षों के पदों के आरक्षण के लिए जिला को एक इकाई माना गया है । यहां भी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण दिया जाएगा, जिसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग शामिल हैं । पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण की अधिकतम सीमा 15% है । कुल प्रधान और अध्यक्ष पदों में से 50% महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे ।
यह भी स्पष्ट किया गया है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं के आरक्षण के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों का उपयोग किया जाएगा । वहीं, पिछड़ा वर्ग के लिए हिमाचल प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा 1993-94 में किए गए सर्वेक्षण के आंकड़ों का इस्तेमाल होगा ।



