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मनरेगा समाप्त करने का फैसला जनविरोधी, हिमाचल को होगा सीधा नुकसान: मुख्यमंत्री

➤ मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडल सहयोगियों संग शिमला रिज में दिया धरना
➤ मनरेगा में बदलाव को ग्रामीण गरीबों पर सीधा प्रहार बताया
➤ सेब पर आयात शुल्क घटाने का भी किया विरोध


मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज शिमला के रिज मैदान में महात्मा गांधी की प्रतिमा के समीप मंत्रिमंडल सहयोगियों के साथ मनरेगा को समाप्त/कमजोर करने के विरोध में धरना दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार का यह फैसला जनविरोधी है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब और मजदूर वर्ग को भारी नुकसान होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मनरेगा योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू की गई थी। यह योजना पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की दूरदर्शी सोच का परिणाम थी। उन्होंने कहा कि पहले ग्राम पंचायत और ग्राम सभा की मांग के आधार पर विकास कार्य तय होते थे, लेकिन अब पंचायतों की भूमिका सीमित कर दी गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले मनरेगा में 100 प्रतिशत मजदूरी केन्द्र सरकार द्वारा दी जाती थी, जबकि प्रदेश सरकार अतिरिक्त 80 रुपये मजदूरों को देती थी।
अब नए प्रावधानों के तहत 90 प्रतिशत मजदूरी केन्द्र और 10 प्रतिशत प्रदेश सरकार को वहन करनी होगी, जिससे हिमाचल प्रदेश पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।

उन्होंने मांग की कि मनरेगा को पंचायतों की जरूरतों और मांगों के अनुसार लागू किया जाए, ताकि ग्रामीण विकास की वास्तविक आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई व्यवस्था में जिला परिषदों में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को मिलने वाली राशि को भी समाप्त कर दिया गया है, जिससे प्रशासनिक कार्यों पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा सेब पर आयात शुल्क घटाना भी प्रदेश के हितों के खिलाफ है। इससे हिमाचल के बागवानों को बड़ा नुकसान होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे को केन्द्र सरकार के समक्ष मजबूती से उठाया जाएगा।

धरने में उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार, उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी, आयुष मंत्री यादवेन्द्र गोमा, विधायक चन्द्रशेखर, अनुराधा राणा, राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा, प्रधान सलाहकार मीडिया नरेश चौहान, शिमला नगर निगम के महापौर सुरेन्द्र चौहान, उप महापौर उमा कौशल सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पार्षद और विभिन्न बोर्ड–निगमों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।