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सेवा विस्तार पर सरकार से जवाब तलब, सीएस हलफनामा पेश करें

हाईकोर्ट ने 2017 से अब तक दिए सभी सेवा विस्तार का मांगा पूरा ब्यौरा
मुख्य सचिव संजय गुप्ता को हलफनामा दाखिल करने के आदेश
प्रमोशन इंक्रीमेंट मामले में सरकार की अपील पर 18 अप्रैल को सुनवाई


हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को दिए जा रहे सेवा विस्तार और पुनर्रोजगार को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव संजय गुप्ता को निर्देश दिए हैं कि वर्ष 2017 से अब तक दिए गए सभी सेवा विस्तार मामलों का विस्तृत ब्योरा हलफनामे के माध्यम से अदालत में प्रस्तुत किया जाए। मामला 19 दिसंबर 2017 को जनहित में दिए गए उस महत्वपूर्ण निर्णय से जुड़ा है, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि सेवानिवृत्ति आयु के बाद किसी भी कर्मचारी को तब तक सेवा विस्तार नहीं दिया जाएगा, जब तक वह हैंडबुक ऑन पर्सनल मैटर्स के अध्याय-22 और फंडामेंटल रूल्स 56 (डी) के विशेष प्रावधानों के अंतर्गत न आता हो।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि स्पष्ट आदेशों के बावजूद राज्य सरकार ने कई सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों को नियमों के विरुद्ध सेवा विस्तार दिया है। अदालत के समक्ष ऐसे आदेश भी रखे गए, जिन्हें 2017 के निर्णय का प्रत्यक्ष उल्लंघन बताया गया। न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की अदालत ने सरकार को 19 दिसंबर 2017 से अब तक दिए गए सभी सेवा विस्तारों की सूची प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल को निर्धारित की गई है।

अदालत में यह भी दलील दी गई कि सेवा विस्तार केवल उन मामलों में दिया जाना चाहिए, जहां संबंधित अधिकारी के पास विशिष्ट ज्ञान, अतिरिक्त क्षमता, बौद्धिक दक्षता और वैज्ञानिक योग्यता हो। ऐसे दुर्लभ मामलों को छोड़कर सामान्य रूप से सेवा विस्तार देना नियमों और न्यायालयों के निर्देशों की अवहेलना है। अधिवक्ता ने कहा कि प्रदेश में चाहे किसी भी दल की सरकार रही हो, सेवानिवृत्त कर्मचारियों को व्यापक स्तर पर सेवा विस्तार दिया गया है, जो नियमावली के विपरीत है।

इसी बीच, सरकारी कर्मचारियों को प्रमोशन इंक्रीमेंट देने के एकल जज के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने अपील दायर की है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावलिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने इस अपील पर सुनवाई करते हुए सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए हैं। हालांकि, एकल जज के फैसले पर फिलहाल कोई अंतिम रोक नहीं लगाई गई है। अदालत ने सरकार की ओर से अपील दायर करने में हुई 176 दिनों की देरी को भी माफ कर दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 18 अप्रैल को होगी।

यह प्रकरण उन जूनियर बेसिक टीचर्स से जुड़ा है, जिन्हें 1 अक्तूबर 2012 से पहले हेड टीचर पद पर पदोन्नत किया गया था। एकल जज ने 28 मई 2025 के निर्णय में ऐसे शिक्षकों को प्रमोशन इंक्रीमेंट देने का निर्देश दिया था। विभाग द्वारा आदेशों की अनुपालना न किए जाने पर क्रियान्वयन याचिका दायर की गई। बाद में 3 सितंबर 2025 को उपनिदेशक, स्कूल शिक्षा (प्रारंभिक) शिमला ने कार्यालय आदेश जारी कर हाईकोर्ट के निर्देश लागू करने को कहा और कुछ कर्मचारियों को लाभ भी जारी किया गया। अब सरकार की अपील के बाद मामले में नया मोड़ आ गया है।

अदालत की सख्ती ने राज्य में सेवा विस्तार और पदोन्नति लाभ से जुड़े मामलों पर व्यापक बहस छेड़ दी है। आने वाली सुनवाई में सरकार को विस्तृत जवाब देना होगा, जिससे स्पष्ट होगा कि नियमों का पालन हुआ या नहीं।