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इच्छामृत्यु के बाद हरीश राणा की अस्थियां हरिद्वार में विसर्जित, कांगड़ा के पलेटा गांव में होंगे अंतिम संस्कार के कर्मकांड

13 साल की पीड़ा के बाद इच्छामृत्यु लेने वाले हरीश राणा की अस्थियां हरिद्वार में गंगा में विसर्जित
कांगड़ा के पैतृक गांव पलेटा लौट रहा परिवार, वहीं होंगे तेरहवीं सहित सभी कर्मकांड
गांव और क्षेत्र में शोक की लहर, ग्रामीणों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि


कांगड़ा/हरिद्वार। 13 वर्षों तक असहनीय शारीरिक पीड़ा से जूझने के बाद इच्छामृत्यु के माध्यम से जीवन से विदा लेने वाले हरीश राणा की अस्थियां वीरवार को हरिद्वार में गंगा नदी में विसर्जित कर दी गईं। इसके बाद उनका परिवार हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित पैतृक गांव पलेटा के लिए रवाना हो गया है, जहां तेरहवीं सहित अन्य धार्मिक कर्मकांड पूरे किए जाएंगे।

जानकारी के अनुसार, गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित राज एंपायर सोसायटी में बुधवार देर शाम हरीश राणा की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। इस दौरान सोसायटी के लोग और परिचित बड़ी संख्या में मौजूद रहे। परिवार गहरे शोक में डूबा हुआ था और काफी समझाने के बाद ही वे श्रद्धांजलि सभा में शामिल हो सके। हरीश के पिता अशोक राणा भी कई बार आग्रह के बाद सभा में पहुंचे। सभा में मौजूद लोगों ने हरीश राणा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके परिवार के साहस और धैर्य को नमन किया।

सोसायटी के निवासी एनपी शर्मा ने बताया कि अस्थियां एकत्र करने के बाद परिवार हरिद्वार पहुंचा, जहां पूरे धार्मिक विधि-विधान के साथ गंगा में उनका विसर्जन किया गया। इसके बाद परिवार अब हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के अपने पैतृक गांव पलेटा के लिए रवाना हो गया है। गांव में तेरहवीं संस्कार और अन्य धार्मिक अनुष्ठान पूरे किए जाएंगे, जिसके बाद ही परिवार वापस लौटेगा।

इधर, पलेटा गांव में हरीश राणा के निधन की खबर से शोक का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि भले ही हरीश का परिवार लंबे समय से गांव से बाहर रह रहा था, लेकिन उनका गांव से भावनात्मक रिश्ता हमेशा बना रहा। जैसे ही परिवार के गांव पहुंचने की सूचना मिली, क्षेत्र में शोक और संवेदना का माहौल गहरा गया। ग्रामीणों ने कहा कि हरीश राणा का निधन केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक भावनात्मक क्षति है।

गांव के लोग इस कठिन समय में परिवार के साथ खड़े हैं और हरीश राणा की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। वहीं कुछ स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कोई जनप्रतिनिधि या अधिकारी परिवार से मिलने नहीं पहुंचा, जिस पर हैरानी जताई जा रही है।