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सार्वजनिक शौचालयों की बदहाली पर हाईकोर्ट सख्त, अधिकारियों से मांगा जवाब

  • सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालयों की बदहाली पर हाईकोर्ट ने जताई सख्त नाराजगी
  • नगर निगम शिमला और संबंधित अधिकारियों को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश
  • यूएस क्लब के ऐतिहासिक गेट को तोड़े जाने के मामले में भी कोर्ट ने मांगा जवाब

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राजधानी शिमला समेत पूरे प्रदेश में सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालयों की खराब स्थिति को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने नगर निगम शिमला और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे एक विस्तृत और बेहतर हलफनामा दाखिल करें, जिसमें यह स्पष्ट बताया जाए कि अदालत के पूर्व निर्देशों के बाद जमीन पर क्या सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं और वर्तमान में शौचालयों की स्थिति क्या है।

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए नाराजगी व्यक्त की कि एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद शिमला नगर निगम की ओर से कोई ठोस कार्रवाई रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं की गई है। मामले की अगली सुनवाई अब 21 जुलाई को निर्धारित की गई है।

अदालत के समक्ष यह तथ्य रखा गया कि 20 मई 2025 को नगर निगम शिमला के आयुक्त की ओर से एक हलफनामा दाखिल किया गया था, जिसमें मुख्य स्वच्छता निरीक्षक और वार्ड पार्षदों द्वारा सभी 34 वार्डों का निरीक्षण करने की जानकारी दी गई थी। इस निरीक्षण में कई सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति बेहद दयनीय पाई गई थी तथा गंदगी, कचरे के हॉटस्पॉट और अवैध बैनर-पोस्टरों की पहचान की गई थी।

हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि रिपोर्ट में गंभीर खामियां सामने आने के बावजूद एक साल बाद भी प्रशासन यह बताने में असफल रहा है कि इन समस्याओं को दूर करने के लिए कौन-कौन से प्रभावी कदम उठाए गए हैं। अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अगली सुनवाई से पहले स्थिति स्पष्ट करें।

5,548 सामुदायिक परिसरों में से केवल 2,606 का निरीक्षण

सुनवाई के दौरान ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की ओर से जनवरी 2025 में दायर हलफनामे का भी उल्लेख किया गया। इसके अनुसार प्रदेश में कुल 5,548 सामुदायिक स्वच्छता परिसर हैं, लेकिन अब तक केवल 2,606 परिसरों का ही निरीक्षण किया जा सका है।

हालांकि प्रशासन का दावा है कि सभी ब्लॉक विकास अधिकारियों के माध्यम से शौचालयों के रखरखाव के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की जा रही है।

वहीं, सुलभ इंटरनेशनल सोशल सर्विस ऑर्गेनाइजेशन की हिमाचल शाखा द्वारा 7 अप्रैल 2026 को दाखिल हलफनामे में बताया गया कि उनके नियंत्रण वाले पे-एंड-यूज शौचालयों में खराब नलकों को बदला गया है, फर्श की मरम्मत की गई है और महिलाओं के लिए सैनिटरी पैड की व्यवस्था भी की गई है।

यूएस क्लब गेट तोड़ने के मामले में भी हाईकोर्ट सख्त

हाईकोर्ट ने शिमला के ऐतिहासिक यूएस क्लब गेट को सड़क चौड़ीकरण के दौरान तोड़े जाने के मामले का भी स्वतः संज्ञान लिया है। अदालत ने इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज करते हुए लोक निर्माण विभाग और नगर निगम शिमला को नोटिस जारी किए हैं।

खंडपीठ ने कहा कि यदि सड़क चौड़ीकरण के लिए गेट को हटाना आवश्यक था, तब भी उसकी ऐतिहासिक और विरासत महत्व की संरचना को सुरक्षित रखते हुए उसी डिजाइन में दोबारा स्थापित करने का प्रयास किया जाना चाहिए था।

अदालत ने संबंधित विभागों से विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। इस मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी।