➤ सरकार के सख्त रुख से हड़ताल पड़ी फीकी
➤ एस्मा लागू होने के बाद यूनियन ने बदले तेवर
➤ 500 नए चालकों की भर्ती का परिणाम जल्द
हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) में प्रस्तावित चालक-परिचालक हड़ताल सरकार के सख्त रुख और पहले से किए गए व्यापक इंतजामों के चलते शुरू होने से पहले ही कमजोर पड़ती नजर आई। एस्मा (आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम) लागू होने, वैकल्पिक कर्मचारियों की तैनाती और अन्य कर्मचारी संगठनों का अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने के कारण यूनियन को अपने आंदोलन के फैसले पर पुनर्विचार करना पड़ा। ताजा घटनाक्रम से यह संकेत मिले हैं कि प्रदेश में बस सेवाएं सामान्य रूप से संचालित रहने की संभावना काफी बढ़ गई है।
हड़ताल की घोषणा के बाद सरकार और निगम प्रबंधन ने किसी भी संभावित व्यवधान से निपटने के लिए तेजी से कदम उठाए। निगम में 656 अस्थायी चालकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इसके साथ ही हाल ही में पदोन्नत हुए चालकों और परिचालकों को भी बस संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई। सरकार ने विभिन्न स्तरों पर कर्मचारियों की तैनाती की योजना तैयार कर यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
इसी बीच यूनियन के पदाधिकारी सचिवालय पहुंचे और अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी नजीम के साथ बैठक की। बैठक में कर्मचारियों की मांगों, लंबित मुद्दों और विवादित मामलों पर विस्तार से चर्चा हुई। दूसरी ओर एचआरटीसी सर्व कर्मचारी यूनियन की निगम प्रबंधन के साथ भी बैठक हुई, जिसमें हड़ताल पर न जाने का निर्णय सामने आया। इससे सरकार और निगम प्रबंधन को बड़ी राहत मिली।
सर्व कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष समर चौहान ने कहा कि सरकार द्वारा एस्मा लागू किए जाने के बाद हड़ताल का औचित्य नहीं रह जाता। उन्होंने माना कि मौजूदा परिस्थितियों में आंदोलन को आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा। यूनियन के इस रुख को सरकार की रणनीति की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने स्पष्ट किया कि एचआरटीसी जैसी आवश्यक सेवा में राजनीतिक एजेंडे के तहत हड़ताल स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में भी अदालत एचआरटीसी की हड़ताल को गलत ठहरा चुकी है। सरकार जनता की सुविधा से समझौता नहीं करेगी और जरूरत पड़ने पर सख्त फैसले लेने से पीछे नहीं हटेगी।
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि निगम में 500 चालकों की भर्ती का परिणाम जल्द घोषित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 98 प्रतिशत चालकों और परिचालकों को उनकी पसंद के स्थानों पर तैनाती दी जा चुकी है। सरकार नियमित रूप से वेतन और पेंशन का भुगतान कर रही है तथा निगम कर्मचारियों को राज्य सरकार के कर्मचारियों के समान महंगाई भत्ता भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि निगम कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) का लाभ भी दिया जा रहा है। 1 जनवरी 2023 से 30 मार्च 2026 तक पेंशनरों को 239.45 करोड़ रुपये के लाभ दिए गए हैं, जिनमें डेथ एवं रिटायरमेंट ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट और संशोधित पेंशन शामिल हैं। इसी अवधि में कर्मचारियों को ओवरटाइम, रात्रि भत्ता, महंगाई भत्ता और एरियर समेत 74.39 करोड़ रुपये के वित्तीय लाभ दिए गए हैं। इस प्रकार सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनरों को कुल 314 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक राहत प्रदान की है।
फिलहाल सरकार और यूनियन के बीच संवाद जारी है, लेकिन हालात को देखते हुए यह साफ है कि सरकार की तैयारियों और सख्त रुख ने प्रस्तावित हड़ताल की धार को काफी हद तक कुंद कर दिया है। इससे प्रदेश भर के लाखों यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है।



