➤ गैस सिलिंडर हादसे में बच्चे की मौत पर परिवार को 10 लाख रुपये बीमा क्लेम का आदेश
➤ उपभोक्ता आयोग ने इंडियन ऑयल, गैस एजेंसी और बीमा कंपनी को संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराया
➤ आयोग ने कहा- गैस कनेक्शन के साथ मिलने वाले बीमा की जानकारी देना कंपनियों की जिम्मेदारी
शिमला: हिमाचल प्रदेश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, शिमला ने गैस सिलिंडर हादसे में छह वर्षीय बच्चे की मौत से जुड़े करीब 10 वर्ष पुराने मामले में पीड़ित परिवार को बड़ी राहत देते हुए 10 लाख रुपये की बीमा राशि और 70 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, संबंधित गैस एजेंसी और नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को संयुक्त रूप से भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आयोग ने स्पष्ट किया कि गैस कनेक्शन जारी करते समय उपभोक्ताओं को मिलने वाले बीमा कवर की जानकारी देना संबंधित कंपनियों की कानूनी जिम्मेदारी है।
मामले के अनुसार ठियोग निवासी राजेश ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी कि 13 दिसंबर 2011 को घर में गैस सिलिंडर पर रेगुलेटर लगाते समय अचानक आग लग गई। इस हादसे में उनका छह वर्षीय बेटा सौरव गंभीर रूप से झुलस गया और दम घुटने से उसकी मौत हो गई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उन्हें दोषपूर्ण गैस सिलिंडर उपलब्ध कराया गया था और हादसे के बाद भी संबंधित कंपनियों ने वर्षों तक उन्हें जांच के नाम पर गुमराह किया।
सुनवाई के दौरान इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने दावा किया कि सिलिंडर में कोई निर्माण संबंधी खराबी नहीं थी और हादसा उपभोक्ता द्वारा नॉन-स्टैंडर्ड रबर पाइप तथा रेगुलेटर के उपयोग के कारण हुआ। वहीं नेशनल इंश्योरेंस कंपनी ने यह दलील दी कि हादसे की समय पर सूचना नहीं मिलने के कारण बीमा क्लेम स्वीकार नहीं किया जा सकता।
हालांकि आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की पीठ ने सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि हादसे के बाद कंपनियों ने पीड़ित परिवार की सहायता करने के बजाय जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालकर उन्हें वर्षों तक कानूनी प्रक्रिया में उलझाए रखा। आयोग ने इसे सेवा में गंभीर कमी माना।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि अधिकांश गैस उपभोक्ताओं को यह जानकारी ही नहीं होती कि घरेलू एलपीजी गैस कनेक्शन के साथ उन्हें समूह बीमा कवर भी मिलता है। ऐसे में गैस एजेंसियों और तेल कंपनियों की जिम्मेदारी है कि वे प्रत्येक उपभोक्ता को बीमा संबंधी सभी नियमों और अधिकारों की स्पष्ट जानकारी दें।
आयोग ने इस आदेश की प्रति भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI), केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय और हिमाचल प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को भी भेजने के निर्देश दिए हैं, ताकि भविष्य में सभी गैस उपभोक्ताओं को उनके बीमा अधिकारों की जानकारी सुनिश्चित की जा सके।
गैस कनेक्शन के साथ मिलता है बीमा कवर
आयोग ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि अधिकृत गैस एजेंसी से लिए गए घरेलू एलपीजी कनेक्शन के साथ समूह बीमा सुविधा उपलब्ध रहती है। निर्धारित शर्तें पूरी होने पर दुर्घटना की स्थिति में मृत्यु, स्थायी अथवा आंशिक विकलांगता, चिकित्सा खर्च और संपत्ति के नुकसान पर भी बीमा दावा किया जा सकता है। आयोग ने कहा कि इस सुविधा की जानकारी उपभोक्ताओं तक पहुंचाना संबंधित कंपनियों की जिम्मेदारी है।



