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हिमाचल में बारिश का कहर, मनाली-काजा और चंबा-तीसा हाईवे बंद

हिमाचल में मानसून ने बढ़ाई मुश्किलें, भारी बारिश से मनाली-काजा और चंबा-तीसा हाईवे बंद
रामपुर में अस्थायी पुल बहा, तीन पंचायतों का संपर्क टूटा, 44 सड़कें और 254 ट्रांसफॉर्मर ठप
2 से 4 जुलाई तक 72 घंटे भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट, लोगों को सतर्क रहने की सलाह


हिमाचल प्रदेश में मानसून की दस्तक के साथ ही प्रदेशभर में तेज बारिश ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। कई जिलों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण सड़कें बंद हो गई हैं, बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई है और कई ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क टूट गया है। मौसम विभाग (IMD) ने 2 से 4 जुलाई तक प्रदेश के मैदानी और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए लोगों से अतिरिक्त सतर्कता बरतने की अपील की है।

प्रदेश में बीती रात सबसे अधिक 102.5 मिमी बारिश कांगड़ा के नगरोटा सूरियां में दर्ज की गई, जबकि घमरोर में 95.2 मिमी वर्षा रिकॉर्ड हुई। चंबा जिले में सुबह से लगातार बारिश होने के कारण चंबा-तीसा हाईवे सहित कई संपर्क मार्ग अवरुद्ध हो गए हैं। इससे लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है और प्रशासन सड़कें बहाल करने में जुटा हुआ है।

उधर, मनाली-काजा राष्ट्रीय राजमार्ग-505 भी चिचोंग-खोलकसा के पास बंद हो गया है। यहां पानी की निकासी के लिए लगाए गए कलवर्ट के जाम होने से सड़क का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। लगातार बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तेजी से बर्फ पिघलने के कारण नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे कई इलाकों में खतरा बढ़ गया है।

लाहौल-स्पीति के जहालमा नाले में आई बाढ़ के बाद स्थानीय लोग अपनी जान जोखिम में डालकर नाला पार करने को मजबूर हैं। किसान अपनी फसलों को मजदूरों की मदद से नाले के आर-पार पहुंचा रहे हैं। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है, लेकिन कई स्थानों पर आवाजाही पूरी तरह बाधित है।

शिमला जिले के रामपुर उपमंडल के गानवी क्षेत्र में बीती रात भारी बारिश के कारण खड्ड पर बना अस्थायी पुल बह गया। पुल टूटने से तीन पंचायतों का संपर्क शेष क्षेत्र से कट गया है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय प्रशासन ने स्थिति का जायजा लेकर वैकल्पिक व्यवस्था करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटे में हुई बारिश के बाद 44 सड़कें बंद हो गई हैं, जबकि 254 बिजली ट्रांसफॉर्मर भी ठप हो गए हैं। मंडी जिले में सबसे अधिक 28 सड़कें और कुल्लू में 14 सड़कें बंद हैं। बिजली और सड़क व्यवस्था बहाल करने के लिए संबंधित विभाग युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं।

मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अगले छह दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। बुधवार को किन्नौर, लाहौल-स्पीति और कुल्लू को छोड़कर अन्य सभी जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है। वहीं किन्नौर और लाहौल-स्पीति में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी भी दी गई है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आज रात से वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और अधिक सक्रिय होगा, जिसके प्रभाव से 2 से 4 जुलाई तक प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसे देखते हुए प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी-नालों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और पहाड़ी ढलानों के आसपास जाने से बचें। खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा न करें और मौसम विभाग की चेतावनियों पर लगातार नजर रखें। विशेष रूप से पर्यटकों को सलाह दी गई है कि वे मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा करें।

मौसम विभाग के अनुसार, मानसून अब पूरे किन्नौर के साथ-साथ कुल्लू और लाहौल-स्पीति के अधिकांश क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। इसके अलावा शिमला, मंडी, सिरमौर और कांगड़ा के कई हिस्सों में भी मानसून सक्रिय हो गया है। अगले तीन से चार दिनों में अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने की संभावना जताई गई है।