➤ विधानसभा परिसर में कांग्रेस-BJP का प्रदर्शन, हाथों में तख्तियां लेकर पहुंचे विधायक
➤ वंदे मातरम पर गतिरोध जारी, जयराम ठाकुर बोले-CWC का फैसला नहीं चलेगा
➤ बेरोजगारी पर काम रोको प्रस्ताव की तैयारी, प्रश्नकाल में आपदा और राहत राशि पर भी सवाल
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन शनिवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही परिसर का माहौल गर्म हो गया। कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों के विधायक अलग-अलग मुद्दों को लेकर विधानसभा परिसर में प्रदर्शन करते नजर आए। दोनों पक्षों के हाथों में तख्तियां थीं और अपने-अपने मुद्दों को लेकर नारेबाजी की गई।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर में भाजपा के खिलाफ प्रदर्शन किया। कांग्रेस की ओर से भाजपा पर राष्ट्रगान के अपमान का आरोप लगाते हुए नारे लगाए गए। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस विधायकों ने “चंदा चोर कहां मिलेंगे” जैसे नारे भी लगाए।
दूसरी ओर भाजपा विधायकों ने भी विधानसभा परिसर में प्रदर्शन कर सरकार पर कई मुद्दों को लेकर निशाना साधा। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने विधानसभा की लाइव रिकॉर्डिंग विपक्षी विधायकों को उपलब्ध कराने की मांग उठाई।
जयराम ठाकुर बोले- लाइव रिकॉर्डिंग देखकर तय हो कि किसने राष्ट्रगान का अपमान किया
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मीडिया के सामने विपक्ष पर राष्ट्रगान के अपमान का आरोप लगाया है। ऐसे में विधानसभा की लाइव रिकॉर्डिंग विपक्ष को दी जानी चाहिए, ताकि रिकॉर्डिंग देखकर यह स्पष्ट किया जा सके कि आखिर विपक्ष के किस विधायक ने और किस तरह राष्ट्रगान का अपमान किया।
जयराम ठाकुर ने कहा कि यदि आरोप लगाए जा रहे हैं तो उसका आधार भी सामने आना चाहिए। उन्होंने विधानसभा की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग सार्वजनिक किए जाने की मांग करते हुए कहा कि रिकॉर्डिंग देखकर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
विपक्ष के इस रुख से साफ है कि राष्ट्रगान और वंदे मातरम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब विधानसभा के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है।
वंदे मातरम पर जयराम का निशाना, बोले- CWC का फैसला लागू नहीं होगा
विवाद के केंद्र में वंदे मातरम भी बना हुआ है। जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुक्खू के उस कथित मीडिया बयान का जिक्र किया, जिसमें कांग्रेस वर्किंग कमेटी यानी CWC की बैठक में दो ही स्टेंजा गाने की बात कही गई थी।
जयराम ठाकुर ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि CWC की बैठक में यह फैसला किया गया है कि केवल दो स्टेंजा गाए जाएंगे, तो यह वंदे मातरम के सम्मान को लेकर कांग्रेस की सोच को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम गाया जाएगा या नहीं, यह लोकसभा में तय कानून से निर्धारित होगा, न कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी के फैसले से।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि CWC का तय किया हुआ फैसला नहीं चलेगा। इस बयान के बाद वंदे मातरम को लेकर दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं।
शुक्रवार के हंगामे के बाद आज फिर छाया रहा वंदे मातरम विवाद
वंदे मातरम को लेकर विवाद शुक्रवार को भी विधानसभा के भीतर देखने को मिला था। सदन में इस मुद्दे पर हंगामा हुआ था। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही शनिवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी थी।
शनिवार को कार्यवाही शुरू होने के बाद शुरुआती चरण में सदन में दो दिवंगत पूर्व विधायकों विजयेंद्र सिंह और राम चंद भाटिया के निधन पर शोक सभा आयोजित की गई। सदन ने दोनों पूर्व विधायकों को श्रद्धांजलि दी।
शोकोद्गार की कार्यवाही के बाद सदन की आगे की कार्यवाही में प्रश्नकाल और अन्य विधायी कार्य होने हैं।
बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में भाजपा
वंदे मातरम विवाद के बीच अब बेरोजगारी का मुद्दा भी सदन में गर्माने की तैयारी में है। भाजपा विपक्ष के तौर पर सरकार को कांग्रेस के चुनावी वादों की याद दिलाने की तैयारी में है।
भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के दौरान प्रदेश के युवाओं को हर साल एक लाख रोजगार देने का वादा किया था। पार्टी का कहना है कि पांच साल के कार्यकाल में कुल पांच लाख रोजगार देने का वादा किया गया था, लेकिन सरकार अब तक इस लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाई है।
भाजपा का दावा है कि प्रदेश में अब तक केवल कुछ हजार युवाओं को ही रोजगार मिल पाया है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष सदन में काम रोको प्रस्ताव लाने की तैयारी में है।
यदि विपक्ष की यह मांग स्वीकार होती है तो सदन की सामान्य विधायी कार्यवाही प्रभावित हो सकती है और बेरोजगारी के मुद्दे पर चर्चा होने तक दूसरे विधायी काम आगे खिसक सकते हैं।
प्रस्ताव स्वीकार हुआ तो सदन में बढ़ सकता है हंगामा
भाजपा यदि बेरोजगारी पर काम रोको प्रस्ताव के जरिए चर्चा की मांग करती है और सरकार की ओर से इसे स्वीकार नहीं किया जाता है, तो सदन में हंगामे के आसार बन सकते हैं।
विपक्ष इस मुद्दे को युवाओं से सीधे जुड़ा विषय बताते हुए सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश करेगा। वहीं सत्ता पक्ष की ओर से सरकार की उपलब्धियों और रोजगार से जुड़े कदमों को सामने रखे जाने की संभावना है।
ऐसे में विधानसभा के दूसरे दिन की कार्यवाही में वंदे मातरम विवाद के बाद बेरोजगारी दूसरा बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
प्रश्नकाल में स्वास्थ्य, शिक्षा और लोक निर्माण विभाग पर सवाल
शोकोद्गार के बाद सदन में प्रश्नकाल शुरू होगा। प्रश्नकाल के दौरान स्वास्थ्य, शिक्षा और लोक निर्माण विभाग से जुड़े कई अहम सवाल सदन में उठाए जाएंगे।
प्रश्नकाल के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू शासकीय कार्यसूची सदन के पटल पर रखेंगे। इसके बाद राज्यपाल की मंजूरी प्राप्त विधेयकों को भी सदन के पटल पर रखा जाएगा।
इस दौरान विभिन्न विभागों से संबंधित नीतियों, योजनाओं और सरकार के कामकाज पर विधायकों की ओर से सवाल पूछे जाएंगे।
मानसून की तबाही और राहत राशि पर भी सरकार से जवाब मांगेगा विपक्ष
भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार ने मानसून की बारिश से प्रदेश में हुई तबाही को लेकर सवाल लगाया है। इसमें भारी बारिश से हुए नुकसान, केंद्र सरकार की ओर से विभिन्न मदों में मिली राहत राशि और आपदा प्रभावित लोगों को उपलब्ध कराए गए बजट से जुड़ी जानकारी मांगी गई है।
मानसून के दौरान हिमाचल के कई हिस्सों में सड़कें, पुल, मकान और दूसरी आधारभूत संरचनाएं प्रभावित हुई हैं। ऐसे में राहत और पुनर्वास पर खर्च होने वाली राशि को लेकर सरकार से सदन में जवाब मांगा जाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रश्नकाल में यह भी स्पष्ट होने की उम्मीद है कि केंद्र से हिमाचल को किन-किन मदों में कितनी राहत राशि प्राप्त हुई और राज्य सरकार ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों में कितनी राशि खर्च की है।
दूसरे दिन भी टकराव के संकेत, कई मुद्दों पर आमने-सामने सरकार और विपक्ष
विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन की शुरुआत ही जिस तरह कांग्रेस-BJP प्रदर्शन और वंदे मातरम विवाद से हुई है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में सदन की कार्यवाही हंगामेदार रह सकती है।
एक तरफ सत्ता पक्ष राष्ट्रगान के कथित अपमान को लेकर भाजपा पर हमलावर है, तो दूसरी तरफ भाजपा वंदे मातरम के मुद्दे और विधानसभा की लाइव रिकॉर्डिंग को लेकर सरकार से जवाब मांग रही है। इसके साथ ही बेरोजगारी और मानसून आपदा जैसे मुद्दे भी विपक्ष के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल हैं।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि सदन में इन मुद्दों पर चर्चा किस दिशा में जाती है और क्या सरकार तथा विपक्ष के बीच टकराव के बावजूद विधानसभा की कार्यवाही सुचारू रूप से चल पाती है।



