➤ हिमाचल में स्कूल पाठ्यक्रम में नशा विरोधी अध्याय जोड़ा जाएगा
➤ मुख्यमंत्री ने कहा– नशे की तस्करी में संलिप्त कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई होगी
➤ हर जिले में बनेगा नशा मुक्ति केंद्र, सिरमौर में 5.34 करोड़ की परियोजना शुरू
Himachal Anti-Drug Campaign: हिमाचल प्रदेश सरकार अब स्कूली शिक्षा में नशे के खिलाफ चेतना को पाठ्यक्रम में शामिल करने जा रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने अंतरराष्ट्रीय नशा विरोधी दिवस पर आयोजित एक समारोह में यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्कूली पाठ्यक्रम में नशे के खिलाफ एक अध्याय जोड़ने जा रही है ताकि बच्चों में बचपन से ही नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता उत्पन्न हो सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी और दुरुपयोग के खिलाफ प्रदेश सरकार ने जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है और जो कर्मचारी या अधिकारी इसमें संलिप्त पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि देवभूमि हिमाचल में नशे के लिए कोई स्थान नहीं है और युवाओं को इसके खिलाफ मोर्चा लेना चाहिए।

सरकार का उद्देश्य हर जिले में एक आधुनिक नशा मुक्ति केंद्र स्थापित करना है। सिरमौर जिले के कोटला-बड़ोग में 5.34 करोड़ रुपये की लागत से 100 बिस्तरों वाला नशा मुक्ति केंद्र स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार पीआईटी-एनडीपीएस एक्ट को 2023 में लागू कर चुकी है, जिसे पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पांच वर्षों तक लागू नहीं कर पाई थी।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर उपस्थित लोगों को नशा मुक्त हिमाचल की शपथ दिलाई और राज्य में नशा निवारण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को सम्मानित किया। सम्मानित लोगों में भुंतर नशा मुक्ति केंद्र के डॉ. सत्याव्रत वैद्य, देहरी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सचिन कुमार, कलगीधर ट्रस्ट बड़ू साहिब, एक पहल वेल्फेयर सोसायटी, गुंजन ऑर्गेनाइजेशन के निदेशक पंकज पंंडित, एसपी गौरव सिंह, बाबा कमलाहिया सेवा संस्था, मानव कल्याण समिति चौपाल, चिड़गांव एंटी ड्रग फोर्स अध्यक्ष नरेंद्र चौहान सहित अनेक संगठन शामिल रहे।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई जन आंदोलन का रूप लेनी चाहिए और प्रत्येक नागरिक को इसमें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि नशा तस्कर समाज के दुश्मन हैं, जो युवाओं का भविष्य अंधकारमय बना रहे हैं। उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की कि वे बच्चों से संवाद बनाए रखें और खेलकूद व रचनात्मक गतिविधियों की ओर उनका ध्यान आकर्षित करें।

समारोह में विशेषज्ञों ने नशीली दवाओं के दुष्प्रभाव, रोकथाम के उपाय और पुनर्वास कार्यक्रमों पर भी विस्तृत चर्चा की। अंत में राजकीय डिग्री कॉलेज कोटशेरा, शिमला के छात्रों ने एक नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से नशे के दुष्परिणामों पर जनजागरूकता का संदेश दिया।



