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पहली बार हिमाचल पहुंचे चालदा महासू, उमड़ा आस्था का सैलाब

➤ उत्तराखंड के जौनसार-बावर से 70 किमी पदयात्रा कर चालदा महासू पहली बार हिमाचल पहुंचे
➤ टौंस नदी पार कर सिरमौर के दुर्गम शिलाई क्षेत्र के पश्मी गांव में होगा विधिवत प्रवास
➤ आज भी हनोल स्थित महासू महाराज मंदिर के लिए राष्ट्रपति भवन से भेजा जाता है नमक


 हिमाचल-उत्तराखंड सीमा पर शनिवार को आस्था का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ पड़ा, जब उत्तराखंड के जौनसार-बावर क्षेत्र से 70 किलोमीटर की पदयात्रा पूरी कर चालदा महासू महाराज पहली बार हिमाचल प्रदेश की धरती पर पहुंचे। भारी जनसमूह के बीच देवता ने टौंस नदी पार कर सिरमौर जिले के शिलाई क्षेत्र में प्रवेश किया।

उत्तराखंड से हिमाचल सीमा में प्रवेश करते समय श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण देवता को सीमा पार करने में लगभग एक घंटे का समय लगा। इस दौरान उद्योग मंत्री हर्षवधन सिंह चौहान और विधायक नाहन अजय सोलंकी सहित हजारों श्रद्धालुओं ने देवता का भव्य स्वागत किया।

पश्मी में बनेगा ऐतिहासिक प्रवास स्थल


उत्तराखंड से शुरू हुई यह पदयात्रा सिरमौर के दुर्गम पश्मी गांव में संपन्न होगी, जहां पश्मी और घासन गांव के ग्रामीणों ने मिलकर करीब दो करोड़ रुपये की लागत से भव्य मंदिर का निर्माण किया है। इस धार्मिक परियोजना में पश्मी गांव के 45 और घासन गांव के 15 परिवारों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

रविवार को चालदा महासू महाराज विधिवत रूप से पश्मी गांव में विराजमान होंगे। यह यात्रा 8 दिसंबर 2025 को हजारों श्रद्धालुओं के साथ शुरू हुई थी, जिसे धार्मिक के साथ-साथ सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का उत्सव माना जा रहा है।

देव आगमन से जुड़ी रहस्यमयी कथा


पश्मी गांव में महासू महाराज के आगमन की नींव वर्ष 2020 में पड़ी थी, जब जौनसार के दसऊ गांव से एक विशाल बकरा (घांडुवा) अचानक पश्मी आकर ठहर गया। परंपरा के अनुसार देवता बकरे के रूप में भी आगमन करते हैं। दो वर्षों बाद 2022 में देव वक्ता ने इसे देव दूत बताया, जिसे देव प्रवास से पहले भेजा गया संकेत माना गया।

न्याय के देवता महासू महाराज


लोक मान्यता के अनुसार महासू देवता भगवान शिव और माता पार्वती के अंश से उत्पन्न चार भाइयों—बासिक, बोथा, पवासी और चालदा महासू—में से एक हैं। इन्हें उत्तराखंड और हिमाचल के लोक देवता के रूप में पूजा जाता है, जो न्याय और रक्षा के लिए प्रसिद्ध हैं।

कथाओं के अनुसार महासू देवता ने राक्षस किरमिक का वध कर क्षेत्र में शांति स्थापित की थी। भक्त चावल के दानों के माध्यम से न्याय और भविष्यवाणी प्राप्त करते हैं।

हनोल मंदिर और राष्ट्रपति भवन से नमक की परंपरा


महासू महाराज का मुख्य मंदिर उत्तराखंड के हनोल में स्थित है, जहां अखंड ज्योति प्रज्वलित रहती है और एक रहस्यमयी जलधारा निकलती है। यहां नारियल, चावल और सिरफल चढ़ाए जाते हैं।

आज भी हर वर्ष राष्ट्रपति भवन से महासू मंदिर के लिए नमक भेजा जाता है, जो सदियों पुरानी आस्था और न्याय के देवता में विश्वास का प्रतीक माना जाता है। पहले ब्रिटिश वायसराय और अब राष्ट्रपति अपनी मन्नत पूरी होने पर नमक अर्पित करते हैं।