➤ रेड अलर्ट के बावजूद सीएम ने थुनाग में आपदा पीड़ितों के साथ बिताई रात
➤ 130 आपदा प्रभावितों को राहत देने वाला थुनाग विश्राम गृह बना केंद्र
➤ मुख्यमंत्री ने सुविधाओं का किया निरीक्षण, भरोसा दिलाया हरसंभव मदद का
पराक्रम चंद, शिमला
मंडी जिले के सिराज विधानसभा क्षेत्र के थुनाग में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू की संवेदनशील पहल चर्चा का विषय बनी हुई है, जब उन्होंने प्रशासन की सलाह के विपरीत रेड अलर्ट के दौरान आपदा प्रभावितों के साथ रात गुजारी। थुनाग विश्राम गृह, जो इस समय प्रदेश का सबसे बड़ा राहत शिविर बना हुआ है, वहीं मुख्यमंत्री ने पीड़ितों के साथ रात बिताकर उनकी पीड़ा को करीब से जाना।

मौसम विभाग द्वारा भारी बारिश की चेतावनी के तहत दो बजे के बाद का समय अति संवेदनशील घोषित किया गया था, ऐसे में प्रशासन ने मुख्यमंत्री को क्षेत्र में रुकने से मना किया था। इसके बावजूद, मुख्यमंत्री ने अपनी सुरक्षा से अधिक प्राथमिकता आपदा पीड़ितों के दुख-संवेदना को दी। प्रशासनिक अधिकारियों ने कई बार आग्रह किया, लेकिन मुख्यमंत्री अपने निर्णय पर अडिग रहे।
थुनाग विश्राम गृह में इस समय 130 से अधिक आपदा प्रभावित लोग ठहरे हुए हैं, जिनमें महिलाएं, छोटे बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले इन सभी से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की, उनका हालचाल जाना और खुद राहत सुविधाओं की व्यवस्था का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रशासन को स्पष्ट संदेश दिया कि राहत कार्यों में कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि बचाव, राहत और पुनर्वास के हर कार्य में तत्परता दिखाई जाए, और सरकारी योजनाओं का लाभ प्रभावितों तक शीघ्र पहुंचाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार हर संकट की घड़ी में अपने लोगों के साथ खड़ी है, और यह केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि नैतिक कर्तव्य है।
मुख्यमंत्री की यह भावनात्मक और साहसी पहल लोगों के दिलों को छू गई है। इससे आम नागरिकों में यह भरोसा भी गहरा हुआ है कि संकट के समय उनका नेतृत्व उनके साथ खड़ा है, न कि केवल निर्देश देता है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू का आपदा प्रभावितों के प्रति समर्पण लगातार सामने आ रहा है। मंडी जिले के थुनाग विश्राम गृह से उन्होंने विभिन्न प्रभावित गांवों के लिए राहत सामग्री के कई वाहन झंडी दिखाकर रवाना किए। इनमें सराज ब्लॉक कांग्रेस की ओर से भेजे गए 100 ड्रम, नादौन विधानसभा क्षेत्र के बड़ा जोन द्वारा प्रदान की गई खाद्य सामग्री व दैनिक जरूरत की वस्तुएं, तथा एनएसयूआई की ओर से भेजी गई राहत सामग्री शामिल रही।
मुख्यमंत्री ने राहत काफिला रवाना करने के बाद थुनाग के रीला गांव का दौरा किया, लेकिन इससे आगे देजी गांव सड़क संपर्क से कटे होने के कारण उन्होंने काफिला यहीं छोड़ा और पैदल यात्रा शुरू की। देजी गांव हाल ही में आपदा का गवाह बना है, जहां 11 लोगों की जान चली गई। मुख्यमंत्री ने पैदल चलकर गांव पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की, उन्हें संवेदना व्यक्त की और भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार हरसंभव सहायता पहुंचाएगी।
मुख्यमंत्री का यह मानवीय पहलू, राहत सामग्री के साथ व्यक्तिगत उपस्थिति और संवेदना का प्रदर्शन, सरकार के गंभीर प्रयासों को दर्शाता है। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए कि राहत सामग्री समय पर और पारदर्शी तरीके से वितरित होनी चाहिए और किसी भी प्रभावित को उपेक्षित न किया जाए।
सराज ब्लॉक कांग्रेस, नादौन से आई जनसहभागिता और एनएसयूआई जैसी छात्र संस्था की भूमिका ने भी राहत कार्यों को गति दी है, जिससे सामुदायिक सहयोग और प्रशासनिक तत्परता का संयोजन दिखा।



