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करुणामूलक नौकरी के लिए वार्षिक आय सीमा को ₹62,500 से बढ़ाकर ₹2.5 लाख तक करने की तैयारी
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जिन आश्रितों के माता-पिता दोनों नहीं हैं, उन्हें भर्ती में दी जाएगी प्राथमिकता
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3,234 लंबित मामलों को लेकर नई नीति पर विचार, जल्द सीएम लेंगे अंतिम निर्णय
Compassionate Jobs: हिमाचल प्रदेश सरकार करुणामूलक आधार पर आश्रितों को सरकारी नौकरी देने की प्रक्रिया को सरल और संवेदनशील बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इस संबंध में कैबिनेट सब कमेटी ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को विस्तृत सिफारिशें सौंप दी हैं, जिन पर शीघ्र निर्णय लिया जा सकता है। सबसे बड़ी राहत यह होगी कि करुणामूलक नौकरी के लिए आय सीमा ₹62,500 से बढ़ाकर ₹2.5 लाख रुपये वार्षिक की जा सकती है।
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, जो कैबिनेट सब कमेटी के अध्यक्ष भी हैं, ने बताया कि जिन अभ्यर्थियों के माता-पिता दोनों नहीं हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी, लेकिन एक बार रिजेक्ट किए गए मामलों पर दोबारा विचार न करने की शर्त पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
सरकारी सेवा के दौरान कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके आश्रित को नौकरी देने की व्यवस्था करुणामूलक आधार पर की जाती है। फिलहाल 3,234 ऐसे मामले लंबित हैं, जिनमें 1,531 विभागों और 1,703 निगमों/बोर्डों से जुड़े हैं। इनमें कई उम्मीदवार उच्च शिक्षा प्राप्त हैं और वे उच्च पदों पर नियुक्ति की मांग कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के तहत एक नई करुणामूलक रोजगार नीति बनाने पर विचार जारी है। यह नीति उदार और सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण के तहत तैयार की जाएगी ताकि अपने परिवार का सदस्य खोने वाले लोगों को न्याय मिल सके।
पूर्व जयराम ठाकुर सरकार द्वारा 22 सितंबर 2022 को जारी अधिसूचना जिसमें एक बार रिजेक्ट केस पर दोबारा विचार न करने का प्रावधान किया गया था, उसे अभी रद्द नहीं किया गया है। इस अधिसूचना के चलते कई योग्य आश्रित नौकरी की दौड़ से बाहर हो गए हैं, जिस पर पुनर्विचार की मांग की जा रही है।



