➤ भारतीय फुटबॉलर दीपक टांगरी ने कुल्लू की शिवानी दुग्गल संग लिए सात फेरे
➤ कुल्लू की वादियों में पंजाब और हिमाचल की परंपराओं का दिखा अनूठा संगम
➤ परिजनों और मेहमानों ने नवदंपती को दिया सुखद वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद
कुल्लू। भारतीय फुटबॉल टीम के मशहूर मिडफील्डर दीपक टांगरी ने हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की बालीचौकी निवासी शिवानी दुग्गल के साथ विवाह बंधन में बंधकर अपने जीवन की नई पारी की शुरुआत कर दी है। कुल्लू की मनमोहक वादियों के बीच संपन्न हुआ यह विवाह समारोह आकर्षण का केंद्र बना रहा, जहां दो परिवारों के साथ-साथ दो संस्कृतियों का खूबसूरत मिलन भी देखने को मिला।
विवाह समारोह में पंजाब और हिमाचल प्रदेश की परंपराओं का अनूठा संगम नजर आया। दोनों राज्यों की रस्मों और रीति-रिवाजों को पूरे सम्मान और उत्साह के साथ निभाया गया। इस दौरान विवाह समारोह में शामिल मेहमानों ने कुल्लू की प्राकृतिक सुंदरता और पारंपरिक माहौल की जमकर सराहना की। कई मेहमानों का कहना था कि बर्फ से ढकी पहाड़ियों और हरी-भरी वादियों के बीच आयोजित यह विवाह किसी विदेशी पर्यटन स्थल से कम नहीं लग रहा था।
शिवानी दुग्गल के परिजनों ने नवदंपती को आशीर्वाद देते हुए उनके सुखद और सफल वैवाहिक जीवन की कामना की। शिवानी के परिजन संत राम ने कहा कि जब दो सकारात्मक विचार और संस्कार एक साथ मिलते हैं तो एक नए और सुंदर जीवन की शुरुआत होती है। उन्होंने हिमाचल की रिश्तेदारी और सामाजिक संस्कृति का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश में रिश्तों को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि परिवार का विस्तार माना जाता है और जीवनभर सुख-दुख में साथ निभाया जाता है।
अगर दीपक टांगरी के खेल करियर की बात करें तो वह भारतीय फुटबॉल के प्रमुख खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। चंडीगढ़ में जन्मे दीपक ने अपने पेशेवर फुटबॉल करियर की शुरुआत इंडियन एरोज से की थी। इसके बाद उन्होंने चेन्नइयिन एफसी और मोहन बागान सुपर जायंट जैसे प्रतिष्ठित क्लबों का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी अलग पहचान बनाई। मैदान पर अपने शानदार प्रदर्शन के कारण वह भारतीय फुटबॉल के भरोसेमंद मिडफील्डरों में शामिल हैं।
वहीं, शिवानी दुग्गल कुल्लू जिले के बालीचौकी क्षेत्र से संबंध रखती हैं। विवाह समारोह में दोनों परिवारों के रिश्तेदारों, मित्रों और शुभचिंतकों ने शिरकत कर नवविवाहित जोड़े को शुभकामनाएं दीं।
दीपक टांगरी और शिवानी दुग्गल का यह विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो संस्कृतियों और परंपराओं का सुंदर संगम माना जा रहा है। कुल्लू की वादियों में संपन्न हुआ यह विवाह समारोह लंबे समय तक लोगों की यादों में बना रहेगा।



