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हिमाचल-अरुणाचल में ग्रामीण आजीविका को मिलेगा बल, मंडी व कुल्लू में अरुणाचल प्रतिनिधिमंडल का तीन दिवसीय दौरा संपन्न

  • अरुणाचल प्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन के 20 सदस्यीय दल ने मंडी व कुल्लू का दौरा किया

  • किसान विकास समिति, शीहाट संस्था और भूटीको का किया निरीक्षण

  • भौगोलिक समानता के आधार पर दोनों राज्यों में दीर्घकालिक साझेदारी का प्रस्ताव



मंडी,  विपलव सकलानी: हिमाचल प्रदेश के मंडी और कुल्लू जिलों में 5 से 6 जून तक अरुणाचल प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (ArSRLM) के 20 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने एक तीन दिवसीय अनुभव यात्रा पूरी की। राज्य मिशन प्रबंधक गायमर टाटा के नेतृत्व में आए इस दल ने विभिन्न सफल आजीविका परियोजनाओं का निरीक्षण किया और हिमाचल में ग्रामीण महिलाओं और किसानों के सशक्तिकरण की कार्यप्रणाली को नजदीक से जाना।

यात्रा के पहले दिन, प्रतिनिधिमंडल ने मंडी जिले के नगवाई क्षेत्र में किसान विकास समिति द्वारा संचालित फल एवं सब्जी प्रसंस्करण इकाई का दौरा किया, जहां दल को जैम, जूस, अचार आदि के निर्माण और विपणन से जुड़ी प्रक्रिया की जानकारी दी गई। समिति के अध्यक्ष जोगिंदर वालिया ने बताया कि यह संस्था 2007 से कार्यरत है और इस वर्ष 1200 से अधिक किसान लाभान्वित हुए हैं। सचिव कर्म चन्द और समन्वयक अभिषेक ने अरुणाचल में ऐसी ही इकाइयों की स्थापना में सहयोग का आश्वासन दिया।

5 जून को प्रतिनिधिमंडल ने कुल्लू जिले के बबेली क्षेत्र में शीहाट संस्था का दौरा किया, जो स्वयं सहायता समूहों के क्लस्टर लेवल फेडरेशन द्वारा संचालित है। यह इकाई जिला विकास प्राधिकरण, पीपल फॉर हिमालयन डेवलपमेंट और आईशर समूह के सहयोग से संचालित है। दल ने यहां हस्तशिल्प और फल आधारित उत्पादों की इकाइयों का निरीक्षण किया और उत्पादन से जुड़ी तकनीकों को समझा।

6 जून को प्रतिनिधिमंडल ने शमशी स्थित जिला बागवानी विभाग के सामुदायिक सुविधा केंद्र और भूटीको सहकारी संस्था का भ्रमण किया। भूटीको में कुल्लू की प्रसिद्ध शालों के निर्माण में महिलाओं की सहभागिता और डिज़ाइन प्रक्रिया को देखा गया। यहां महिला सशक्तिकरण के स्थानीय मॉडल ने दल को गहराई से प्रभावित किया।

समापन समारोह में गायमर टाटा ने कहा कि हिमाचल और अरुणाचल की भौगोलिक स्थितियां मिलती-जुलती हैं, ऐसे में दोनों राज्यों के बीच ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में सहयोग से गरीबों के जीवनस्तर को ऊंचा उठाया जा सकता है। उन्होंने इस अनुभव यात्रा को दीर्घकालिक भागीदारी का आधार बताते हुए हिमाचल के सभी संगठनों का आभार प्रकट किया।